Breaking News
recent

video....भूखण्डों पर 15-15 लाख का ऋण दिया, वहां आशियाने के नाम पर सिर्फ चारदीवारी

पाली . पाली सैंट्रल को-ऑपरेटिव बैंक के मैनेजरों से मिलीभगत कर जिस एजेंट ने जिन पीडि़तों के भूखंडों पर 15-15 लाख रुपए का ऋण स्वीकृत करवाया था। उन पीडि़तों के हिस्से आशियाने के नाम पर महज चारदीवारी ही नसीब हुई है। बाहर से मकान पूरा बना हुआ दिखता है। लेकिन, अंदर तो सिर्फ खाली भूखंड ही नजर आता है। वहीं कुछ पीडि़तों को तो चारदीवारी भी नसीब नहीं हो पाई। इतना कुछ होने के बाद भी बैंक प्रबंधन दोषियों के खिलाफ कोई कार्रवाई अमल में नहीं ला रहा है।

ज्ञात रहे राजेन्द्र नगर निवासी भरत पालीवाल ने 12 से अधिक लोगों को 11 लाख रुपए में भूखण्ड सहित मकान बनाकर देने का विश्वास दिलाकर पौने दो करोड़ रुपए की ठगी की। पत्रिका ने मामला उजागर किया तो कोतवाली पुलिस ने मामले में मुख्य आरोपी राजेन्द्र नगर निवासी भरत पालीवाल पुत्र जीवराज पालीवाल, पीसीसी बैंक की लक्ष्मी मार्केट फतेहपुरिया बाजार शाखा के सेवानिवृत्त मैनेजर अशोक गौड़, नारायण जोशी, अभिषेक सांदू, अनिल कुमार सहित एक अन्य बैंककर्मी के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला गत दिनों दर्ज किया था। बैंक ने भी जांच कमेटी गठित की थी।

छत का भी निर्माण नहीं हुआ

भरत पालीवाल की ठगी का शिकार पंचम नगर निवासी प्रकाश पुत्र देवाराम माली भी हुआ। उसने बताया कि रेलवे पटरी के पास रविदास नगर में भरत पालीवाल ने भूखण्ड बताया और कहा कि इस पर मकान बनाकर 11 लाख रुपए में देगा। उन्हें एक रुपया भी नहीं देना है। मकान बनने के बाद बस बैंक से आने वाले ऋण की किस्त भरनी है। प्रकाश पत्रिका टीम को मौके पर भी ले गया और वह भूखण्ड भी बताया जिस पर मकान बनना था। मौके पर मकान का कार्य कुर्सी लेवल तक ही मिला। प्रकाश ने सवाल उठाया कि जब मकान बना ही नहीं तो बैंक के जिम्मेदार अधिकारियों ने आंख मुंद कर कैसे 15 लाख की बड़ी रकम जारी कर दी।

चारों तरफ दीवारें, अंदर कुछ नहीं
पीडि़त खारड़ा गांव निवासी हेमराज पुत्र कन्हैयालाल गर्ग ने बताया कि भरत पालीवाल ने उसे महादेव नगर में भूखण्ड दिखाया था। उसके जरूरी दस्तावेज लेकर आरोपी ने 15 लाख रुपए का ऋण स्वीकृत करवाया और विश्वास में लेकर उससे साइन करवाकर चेक भी ले लिए। बिना मकान बनाए ही 15 लाख रुपए बैंक से विड्रॉल कर लिए। महादेव नगर के भूखण्ड पर चारों तरफ दीवारों का निर्माण कर रखा था और दरवाजा लगा रखा था। जबकि अंदर किसी तरह का निर्माण नहीं हो रखा था और ना ही छत का काम हो रखा था। उसने बताया कि फिर भी आंख बंद कर न जाने किस लोभ में बैंक अधिकारियों ने आरोपी को ऋण की सारी राशि जारी कर दी।

निर्माण पूरा नहीं, फिर भी जारी कर दी पूरी राशि

हाउसिंग बोर्ड निवासी नरेश शर्मा पुत्र कन्हैयालाल ने पत्रिका टीम को राजेन्द्र नगर शिवदीप नगर में वह भूखण्ड दिखाया। जिस पर भरत पालीवाल ने 11 लाख रुपए में मकान बनाकर देने का विश्वास दिलाया था। फिर आवश्यक दस्तावेज लेकर बैंक से ऋण लिया और उनके हस्ताक्षरयुक्त चेक के जरिए बैंक से 15 लाख निकाल दिए। लेकिन मकान नहीं बनाया। मौके पर मकान का कुर्सी लेवल तक ही काम हो रखा था। नरेश ने भी आरोप लगाया कि बैंककर्मियों ने किस आधार पर इतनी बड़ी रकम बिना किसी सत्यापन, जांच के जारी कर दी। जबकि, मौके पर तो कुर्सी लेवल से ज्यादा का निर्माण तक नहीं है।



Rajasthan Darpan IFTTT

Rajasthan Darpan IFTTT

No comments:

Post a Comment

Powered by Blogger.