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VIDEO : एक नम्बर से दो ट्रेवल्स बसें, राजस्थान सरकार को 20 लाख की चपत

लक्ष्मणसिंह राठौड़ @ राजसमंद

एक ही नम्बर से दो बसें चलाकर राज्य सरकार का लाखों रुपए का टैक्स चोरी करने की ट्रेवल्स कंपनी की कारगुजारी सामने आई। परिवहन दल ने मंगलवार सुबह एक बस पकड़ी, जिसके नम्बर की बस पहले से परिवहन कार्यालय में जब्त है। बाद में उस बस को कार्यालय लाकर रिकॉर्ड खंगाला, तो पहले से जब्त बस फर्जी निकली और मंगलवार सुबह जब्त बस के दस्तावेज सही पाए जाने पर मुक्त कर दी। इस तरह एक ही नम्बर से दो बसों का संचालन कर सरकार को करीब 20 लाख रुपए के टैक्स की चपत लगा दी।

जिला परिवहन अधिकारी अनिल पंड्या ने बताया कि नेगडिय़ा टोल प्लाजा के पास वाहनों की जांच के दौरान परिवहन निरीक्षक रोहितसिंह सोलंकी ने एसएस बुंदीवाल ट्रेवल्स कंपनी की बस रूकवाई। सोलंकी ने बस के नम्बर आरजे 27 पीबी 4311 देखे, फिर बस का पूरा रंग रूप भी वैसा ही दिखा, जैसी बस पहले से जिला परिवहन कार्यालय में उन्हीं के द्वारा जब्त है। सोलंकी ने दस्तावेजों की जांच की, जिसमें बस के चेचिस नम्बर व वाहन नम्बर के मुताबिक दस्तावेज मिल गए, मगर पहले से जब्त बस की सत्यता परखने के लिए उसे परिवहन कार्यालय लाया गया। सोलंकी ने 16 सितम्बर 2018 को इसी नम्बर की बस जब्त की, जो पहले से परिवहन कार्यालय में खड़ी मिली। दोनों बसों का रिकॉर्ड खंगाला, जिसमें एक बस सज्जनगढ़ रोड मल्ला तलाई उदयपुर निवासी सतीशचंद्र बुंदीवाल के नाम पर दर्ज है, जबकि दूसरी बस कालापुरा, नयापुरा, लाडपुरा (कोटा) निवासी राजेन्द्र पुत्र माणकचंद के नाम पर है। पहले से जब्त बस के चेचिस नम्बर से जांच की, तो उसके बस नम्बर आरजे 27 पीबी 4511 होना पाया गया। इस तरह अगस्त 2016 से मार्च 2019 तक बीस लाख तक टैक्स, मय पेनल्टी बकाया होने का अनुमान है।

चेचिस में भी एक अंक का अंतर
एसएस बंदीवाल की मोटर बॉडी एक जैसी है और उसका रंग भी आसमानी एक सा है। दोनों बसों का पंजीयन उदयपुर से है और बस नम्बर 4311 व 4511 है। इसके अलावा चेचिस नम्बर एमएटी461305 डीओबी 01471 है, जबकि दूसरी बस के चेचिस नम्बर में आखरी अंक 70 है।

उदयपुर से एनओसी, कोटा में नहीं दी
एसएस बुंदीवाल ट्रेवल्स की बस उदयपुर के सतीशचंद्र बुंदीवाल ने बस कोटा के राजेन्द्र को बेची। इस पर राजेन्द्र ने बस को कोटा स्थानान्तरित करने के लिए जिला परिवहन अधिकारी उदयपुर ने एनओसी जारी कर दी। उसके बाद शातिर बस संचालक ने वह एनओसी कोटा में जमा ही नहीं कराई। इसके चलते बस का रिकॉर्ड न तो कोटा में दर्ज हुआ और न ही उदयपुर में रहा। ऐसे में टैक्स से बचने के लिए एसएस बुंदीवाल ट्रेवल्स की अन्य बस की ही नम्बर प्लेट लगा दी।



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