जैसलमेर. जैसलमेर मुख्यालय पर सबसे महत्वपूर्ण सडक़ों में से एक और 1.54 करोड़ खर्च कर तैयार कराया गया गौरव पथ लम्बे अर्से से हादसों की राह बना हुआ है, लेकिन जिम्मेदार बेपरवाह बने हुए हैं। सार्वजनिक निर्माण विभाग की ओर से गत अर्से इस सडक़ का चयन गौरव पथ के तौर पर कर उसका विस्तारीकरण करवाया गया था, लेकिन कई वर्षों से यहां डिवाइडर की वाजिब मांग को विभाग ने अनसुना कर दिया और इसका नतीजा यह है कि प्रमुख पर्यटन स्थल सम जाने वाले इस रास्ते पर आए दिन छोटा-बड़ा सडक़ हादसा घटित होता है। कई लोग अपनी जान तक गंवा चुके हैं। घायलों की फेहरिस्त तो खासी लम्बी है। गौरव पथ पर नगरपरिषद की ओर से की गई रात्रि प्रकाश व्यवस्था तो मुंह चिढ़ाने वाली है, क्योंकि उनका उजाला सडक़ तक पहुंच ही नहीं पाता।
2 किलोमीटर में 28 लाइटें
टूरिस्ट बंगलो के पास विजय स्तम्भ से इंदिरा इंडोर स्टेडियम तक की प्रमुख सडक़ पर रात के समय घना अंधेरा ही छाया रहता है। सडक़ के बाएं ओर ही एलइडी लाइट्स लगी हुई हैं। उनका प्रकाश इतना मद्धिम होता है कि सडक़ पर इसका कोई असर नहीं दिखता। इसके अलावा दो किलोमीटर लम्बे फासले में महज 28 लाइटें ही लगी हैं और उनमें से भी कुछ के आगे पेड़ आ जाने से प्रकाश उन्हीं में उलझ कर रह जाता है। गौरव पथ के किनारे पैदल चलने वाले लोगों को इस अंधेरे में बहुत बचकर चलना होता है। यही कारण है कि लोग अब बनाए गए फुटपाथ का उपयोग पैदल चलने के लिए करने में कतराने लगे हैं। कब कोई वाहन उन्हें पीछे से टक्कर लगा जाए अथवा कहां उनका पांव बाहर निकले हुए तार अथवा बने गड्ढे में अटक जाए, कहा नहीं जा सकता।
सडक़ पर हावी उदासीनता
सम जाने वाले इस मार्ग पर वर्ष पर्यंत सैलानियों के वाहनों की आवाजाही रहती है। इसके अलावा इस मार्ग पर सीमा सुरक्षा बल का परिसर, सरकारी कर्मचारियों की कॉलोनी, न्यायिक अधिकारियों के आवास, कई सितारा होटलें, होमगार्ड मुख्यालय और देवी मंदिर तथा इंडोर स्टेडियम आया हुआ है। कायदे से यह सडक़ डिवाइडरयुक्त और रात्रि में प्रकाश से चमचमाती होनी चाहिए लेकिन गौरव पथ का निर्माण करने वाले जिम्मेदार विभाग ने आनन-फानन में ही काम करवा कर कर्तव्य की इतिश्री कर ली तो नगरपरिषद प्रशासन को तो यहां माकूल रात्रि प्रकाश की जरूरत ही महसूस नहीं होती।
मानवाधिकार आयोग तक पहुंचा मामला
इस सडक़ मार्ग पर जिम्मेदारों की लापरवाही से अपने युवा पुत्र को हादसे में गंवाने वाले रूपसिंह राठौड़ पिछले अर्से से न्याय के लिए जूझ रहे हैं। उन्होंने यह मामला राज्य मानवाधिकार आयोग तक पहुंचाया है। रूपसिंह ने बताया कि उन्होंने जनहित में इस सडक़ पर डिवाइडर निर्माण और भरपूर रात्रि प्रकाश व्यवस्था करवाने का जिम्मा उठाया है, ताकि जैसी अनहोनी उनके घर में घटित हुई, वैसी किसी और के साथ नहीं हो। पिछले दिनों आयोग के अधिकारी ने जैसलमेर का दौरा किया था और सानिवि, डिस्कॉम, नगरपरिषद आदि संबंधित विभागों के अधिकारियों के साथ इस मार्ग का निरीक्षण भी किया था।
फैक्ट फाइल -
- 1.54 करोड़ की लागत से बना गौरव पथ
- 03 किलोमीटर है इसकी लम्बाई
- 2017 में बनकर हुआ तैयार
जल्द करवाएंगे व्यवस्था
गौरव पथ पर रात्रिकालीन प्रकाश व्यवस्था को आगामी कुछ दिनों में माकूल किया जाएगा। डिवाइडर निर्माण के लिए पूर्व में इस सडक़ को उपयुक्त नहीं माना गया था। इसके लिए अब किसी विभाग को प्रस्ताव लेना होगा।
- नमित मेहता, जिला कलक्टर, जैसलमेर





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