बुरहानपुर. गर्मी के कहर से जहां जनजीवन प्रभावित हो गया, वहीं केला और गन्ना फसल पर भी इसका असर पड़ा है। पानी की किल्लत और ऊपर से आग बरसाने वाली धूप से फसल सूखने की कगार पर आ गई है। दो दर्जन गांव में ३०० हेक्टेयर से अधिक केला फसल प्रभावित हुई है। किसान संगठन का कहना है कि प्रशासन को दो दिन का समय और दिया है, नहीं तो हम आंदोलन शुरू कर देंगे। क्योंंकि पिछले पंद्रह दिन से अंबाड़ा डेम से पानी छोडऩे की मांग कर रहे हैं।
अप्रैल माह से पड़ रही भीषण गर्मी ने किसानों के लिए मुसीबत खड़ी कर दी। किसानों की केला और गन्ना फसल पर इसका असर पड़ रहा है। बता दें कि किसान भारतीय मजदूर किसान संगठन और प्रगतिशील किसान संगठन अंबाड़ा में ताप्ती नदी पर बने डेम से पानी की मांग की है, ताकि शहर तक पानी आए तो दो दर्जन से अधिक गंाव में लगी केला और गन्ना फसल की सिंचाई हो सके। इसके लिए संबंधित विभाग ने किसानों से एक लाख रुपए से अधिक की राशि भी जमा करा ली, लेकिन आठ दिन बीत गए अब तक पानी का ठिकाना नहीं है।
हमने गेट खुलवाए, लेकिन उतना पानी नहीं
भारतीय मजदूर किसान संघ के प्रदेश उपाध्यक्ष शिवकुमारसिंह कुशवाह ने कहा, अफसरों ने कह दिया कि आप गेट खुलवा लो। हमने हमारे स्तर पर जो प्रयास किए उसमें केवल छह इंच ही गेट खुल सका। इसका पानी अभी उमरदा तक आया है। लेकिन यह पर्याप्त नहीं है। हमने और अधिक गेट खुलवाने की बात कही। अफसरों ने कहा कि अभी चुनावी पर्यवेक्षक आए हैं, हमने भी दो दिन का समय और प्रशासन को दे दिया। नहीं तो हम आंदोलन शुरू कर देंगे।
इन गांव में सबसे अधिक परेशानी
किसानों के मुताबिक सबसे अधिक परेशानी जैनाबाद, जयसिंगपुरा, नसीराबाद, बोरी, बसाड़, निंलगा, सारोला, निंबोला सहित दो दर्जन गांव में असर है। इससे लगे हैंडपंप भी सूख गए हैं। ग्रामीण भी पानी के लिए परेशान है। यहां तक पशुओं के लिए भी पीने का पानी नसीब नहीं हो रहा है। क्योंकि नदी पूरी तरह सूखी पड़ी है।
उत्पादन पर पड़ेगा असर
प्रगतिशील किसान संगठन के अध्यक्ष रघुनाथ पाटिल ने कहा, गर्मी के कारण फसल सूख रही है। फसल तो कट जाएगी फिर व्यापारी लेने में आनाकानी करते हैं, जो भाव बाजार में मिलना चाहिए, वह नहीं मिलेंगे। गर्मी से किसी एक गांव के किसान को परेशानी नहीं है इससे नेपानगर, खकनार, शाहपुर, धूलकोट के किसान भी परेशान है।
ये करें उपाय
केला और गन्ने की खेत में नमी बनाने के लिए घास या भूसा बिछाकर रखे। इससे जमीन में नमी बनी रहने धूप असर नहीं करेंगी।
गर्म हवा बचाने के लिए फसल के चारों ओर नेट लगाए।
ड्रीप व्यवस्था से फसल की सिंचाई करें।
दिन की बजाय रात में फसलों की सिंचाई करना जरूरी है।
रात में पानी देने से रात भर जमीन में नमी बनी रहती है।
दो दर्जन से अधिक गांव में 300 हेक्टेयर से अधिक केला फसल प्रभावित हुई है। केले के पत्ते पीले पडक़र नीचे गिर रहे हैं। करोड़ों रुपए की केला फसल पर असर पड़ा है। प्रशासन को दो दिन का और समय दिया है, नहीं तो हम आंदोलन करेंगे। किसानों ने तो यह भी कहा कि पानी नहीं आया तो गेट खोलने के लिए, जो रुपए हमसे लिए उसके लिए उपभोक्ता फोरम में भी केस लगाएंगे।
शिवकुमारसिंह कुशवाह, उपाध्यक्ष भारतीय मजदूर किसान संघ
75 प्रतिशत गेट खोलने की बात संबंधित अफसर कह रहे हैं। दो गेट जाम है, जो बाद में खोले जाएंगे। यह गेट मई के बाद खुलते हैं, लेकिन समस्या को देखते हुए अभी खोल दिए। फिर भी जो तकनीकी समस्या आ रही है, तो मैंने तकनीकी रिपोर्ट मांगी है, इसके बाद और आगे की कार्रवाई की जाएगी।
वीशा माधवानी, एसडीएम नेपानगर





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