भीलवाड़ा।
जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष मंच ने निजी अस्पताल प्रबंधन को इलाज में लापरवाही बरतने पर सेवा का दोषी माना। अस्पताल प्रबंधन को 5.12 लाख रुपए क्षतिपूर्ति देने के आदेश दिए। मंच अध्यक्ष रमेशचंद मीना और सदस्य विनती तापडि़या ने 4 लाख 2611 रुपए क्षतिपूर्ति, १ लाख मानसिक संताप तथा 10 हजार रुपए परिवाद व्यय देने का निर्णय दिया।
बिजयनगर निवासी रेखा पत्नी राजेन्द्र शर्मा ने देवरिया बालाजी रोड प्रा. बस स्टैण्ड के निकट कृष्णा हॉस्पिटल व उसके चिकित्सक डॉ. सुहास कामड़ी तथा नेशनल इंश्योरेंस कम्पनी के खिलाफ मंच में परिवाद किया। बताया कि दाहिने कूल्हे में दर्द होने पर डॉ. कामड़ी से परामर्श किया। उन्होंने ऑपरेशन की सलाह दी। रेखा हॉस्पिटल में भर्ती हो गई। 26 दिसम्बर 2012 को कूल्हे का ऑपरेशन हुआ। इसके 1 लाख 57,620 रुपए वसूल कर लिए। होश में आने पर परिवादी ने ऑपरेशन की जगह काफी दर्द महसूस किया। उसे इंजेक्शन और दवा दे दी। 12 जनवरी 2013 को परिवादी टांके खुलवाने गई तो पैर में असहनीय दर्द की शिकायत की। चिकित्सक ने छह माह दर्द रहने की बात कही।
उसके बाद फॉलोअप को परिवादी अस्पताल गई तो वहां चिकित्सक कामड़ी के लम्बे अवकाश पर जाने की बात कही। कई बार जाने पर उसे डॉ. कामड़ी नहीं मिले। इस बीच पैर में दर्द असहनीय होता गया। उसने अन्य निजी अस्पताल में परामर्श लिया तो सामने आया कि ऑपरेशन में कमी रह गई है। इससे दर्द हो रहा है। फिर ऑपरेशन की सलाह दी गई। इस दौरान एक वर्ष चार माह तक परिवादी दर्द सहती रही। उसके बाद परिजन उसे अहमदाबाद ले गए, जहां जांच में पाया कि ऑपरेशन के समय पेल्विक बोन में लगाया जाने वाला एसिटाबुलम की लिनीयर कई जगह से टूट गई। इसका एकमात्र इलाज पुन: ऑपरेशन है। 10 अप्रेल 2014 को अहदमाबाद में पुन: ऑपरेशन हुआ तब परिवादी को दर्द से निजात मिली। मंच ने अस्पताल प्रबंधन को 5 लाख 12 हजार 611 रुपए परिवादी को देने के आदेश दिए। इस राशि पर 6 जुलाई 2015 से नौ प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी देना होगा।





No comments:
Post a Comment