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महिला सांसदों के लिए नहीं धड़कता है 'देश का दिल', 7 दशक में केवल सात को चुना

नई दिल्ली। देश का दिल आधी आबादी के प्रतिनिधियों को चुनकर संसद में लाने के लिए नहीं धड़कता है। यह बात देश में अब तक हुए लोकसभा चुनावों और उनमें दिल्ली में चुनी गई कुल महिला सांसदों की संख्या से साबित होती है। देश की राजधानी में पिछले करीब सात दशकों में सिर्फ सात महिला सांसद ही चुनी गई हैं। वहीं, इस दौरान ही यहां से 60 पुरुष सांसद लोकसभा पहुंचे।

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हैरानी वाली बात है कि आजादी मिलने के बाद देश में जितने भी लोकसभा चुनाव आयोजित हुए, उनमें आधे से ज्यादा बार ऐसा हुआ कि राजधानी दिल्ली से कोई महिला प्रतिनिधि संसद ही नहीं पहुंची।

सबसे पहली सांसद सुचेता कृपलानी

देश में आयोजित पहले लोकसभा चुनाव में दिल्ली से सुचेता कृपलानी को चुना गया था। महात्मा गांधी की सहयोगी और स्वतंत्रता सेनानी रहीं कृपलानी नई दिल्ली सीट से किसान मजदूर प्रजा पार्टी के टिकट पर चुनाव मैदान में उतरी थीं।

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किसान मजदूर प्रजा पार्टी की स्थापना सुचेता के पति आचार्य कृपलानी ने की थी। उस चुनाव में सुचेता कृपलानी ने नेहरू गांधी परिवार की सदस्या और कांग्रेस पार्टी की उम्मीदवार मनमोहिनी सहगल को मात दी थी। इसके बाद सुचेता कृपलानी 1957 में कांग्रेस में आ गईं और दोबारा चुनी गईं।

15 साल बाद मिली जीत

सुचेता की जीत के 15 वर्ष बाद वर्ष 1972 में फिर दिल्ली से एक महिला सांसद चुनी गईं। इनका नाम सुभद्रा जोशी था। सुभद्रा ने चांदनी चौक लोकसभा सीट से भारतीय जनसंघ के उम्मीदवार राम गोपाल शालवाले को 45 हजार वोटों के अंतर से शिकस्त दी थी। सुभद्रा पंजाब से पहली महिला सांसद भी थीं।

संजय का विरोध, अटल को शिकस्त

वर्ष 1975-77 में आपातकाल के दौरान सुभद्रा ने तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के पुत्र संजय गांधी के उन कार्यों का जमकर विरोध किया, जिसके तहत शहर के सौंदर्यीकरण केे नाम पर उनके संसदीय क्षेत्र में तोड़-फोड़ की गई थी। इतना ही नहीं इससे पहले 1962 में उत्तर प्रदेश के बलरामपुर में अटल बिहारी वाजपेयी को सुभद्रा हरा चुकी थीं।

सुषमा-मीरा का दौर

सुभद्रा जोशी के बाद दक्षिण दिल्ली संसदीय क्षेत्र से 1996 में सुषमा स्वराज और 1998 में करोलबाग लोकसभा सीट से मीरा कुमार को जनता ने चुना।

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सुषमा स्वराज ने कांग्रेस के कपिल सिब्बल को 1.14 लाख मतों से और अजय माकन को 1.16 लाख मतों के अंतर से हराया था। वहीं, मीरा कुमार ने वर्ष 1996 में भाजपा के कालका दास को 41,000 मतों से मात दी। फिर 1998 में भाजपा के सुरेंद्र पाल रठावल को 4,826 मतों से पराजित किया था।

अनिता ने दी मीरा को शिकस्त

इसके बाद 1999 में अनिता आर्य ने करोल बाग से बतौर भाजपा उम्मीदवार मीरा कुमार को शिकस्त दी। फिर 2004 में कांग्रेस की कृष्णा तीरथ करोल बाग से और 2009 में उत्तर पश्चिम दिल्ली से सांसद बनीं।

जबकि 2014 में चली मोदी लहर में मीनाक्षी लेखी ने नई दिल्ली सीट जीती। लेखी ने आम आदमी पार्टी के उम्मीदवार आशीष खेतान को 1.6 लाख मतों से हराया।

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