अजमेर.
आजादी के बाद हुए पहले लोकसभा और विधानसभा चुनावों में अजमेर में चारों दिशाओं से जनप्रतिनिधि चुने गए थे। यहां अजमेर उत्तर व दक्षिण से सांसद और अजमेर पूर्व और पश्चिम से विधायक चुने गए थे। आजादी के बाद भी करीब 9 साल तक अजमेर की पहचान अलग राज्य के रूप में थी। इस दौरान देश में २६ राज्य थे। अजमेर सहित देश के कुल 26 राज्यों में छह राज्यों में से दो-दो सांसद चुनकर जाते थे। इनमें अजमेर, भोपाल, हिमाचल प्रदेश, कच्छ, मणिपुर, त्रिपुरा थे। यहां अजमेर उत्तर और अजमेर दक्षिण नाम से दो संसदीय क्षेत्र थे। वहीं विधानसभा में भी 24 जनप्रतिनिधि चुनकर जाते थे। इनमें से अजमेर पूर्व व अजमेर पश्चिम नाम से भी दो सीटें थी। इसके चलते पहली लोकसभा और विधानसभा में अजमेर पूर्व, दक्षिण-पश्चिम और उत्तर व दक्षिण से विधायक और सांसद सदनों में पहुंचे। अजमेर उत्तर से कांग्रेस के ज्वालाप्रसाद शर्मा व दक्षिण से मुकुटबिहारी लाल संसद में पहुंचे। वहीं दक्षिण पश्चिम से परसराम व अर्जनदास और पूर्व से बालकृष्ण कौल व हरजीत लाल विधानसभा में पहुंचे। बाद में1 नवम्बर 1956 को अजमेर का राजस्थान में विलय किया गया। इसके बाद विधानसभा की कुल 8 और सांसद की एक ही सीट हो गई।
विधानसभा सीटों का बदल गया था नाम-
उधर बाद में अजमेर शहर की दो विधानसभा सीटों के नाम अजमेर पूर्व व पश्चिम हो गए। इनमें से पूर्व की सीट आरक्षित थी। 2004 से इन विधानसभा सीटों के फिर से बदलकर अजमेर उत्तर व दक्षिण हो गया।
- Report By- Amit Kakra





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