अजमेर. लॉ कॉलेज में सत्र 2019-20 में प्रथम वर्ष के दाखिले अटक सकते हैं। कॉलेज को बार कौंसिल ऑफ इंडिया से मिली अस्थाई मंजूरी की मियाद खत्म होने वाली है। सरकार और महर्षि दयानंद सरस्वती विश्वविद्यालय ने जल्द प्रक्रिया पूरी नहीं करने पर कॉलेज का सिरदर्द बढ़ सकता है।
लॉ कॉलेज को 15 साल से बार कौंसिल ऑफ इंडिया से स्थाई मान्यता नहीं मिल पाई है। कॉलेज को प्रतिवर्ष महर्षि दयानंद सरस्वती विश्वविद्यालय का सम्बद्धता पत्र, निरीक्षण रिपोर्ट और पत्र भेजना पड़ता है। सत्र 2016-17 में तो बीसीआई ने नियम-शर्तें पूरी नहीं करने प्रथम वर्ष के प्रवेश रोक दिए थे। कॉलेज में सीमित संसाधन और शिक्षकों को कमी पूरा करने के लिए सरकार ने अंडर टेकिंग थी। इसके बाद ही प्रवेश की अस्थाई मंजूरी दी गई। पिछले दो सत्रों से यही सिलसिला जारी है।
फिर होंगे उसी स्थिति में...
प्रथम वर्ष के दाखिले के मामले में कॉलेज और सरकार फिर उसी स्थिति में होंगे। सरकार को अजमेर सहित अन्य लॉ कॉलेज में स्थाई प्राचार्य, स्टाफ और संसाधनों की कमी दूर करनी है। ऐसी स्थिति रहने तक बीसीआई सत्र 2019-20 में प्रवेश की मंजूरी नहीं देगा।
शिक्षकों की कमी बरकरार
यूजीसी के नियमानुसार विश्वविद्यालय-कॉलेज के विभागों में एक प्रोफेसर, दो रीडर और तीन लेक्चरर होने चाहिए। राज्य में कई विश्वविद्यालय और कॉलेज इस पर खरा नहीं उतर रहे। अजमेर के लॉ कॉलेज में प्राचार्य सहित सात शिक्षक हैं। दो शिक्षक प्रतिनियुक्ति पर जयपुर में कार्यरत हैं। कॉलेज में शारीरिक शिक्षक, खेल मैदान, सभागार, और अन्य सुविधाएं नहीं हैं।
तीन साल की सम्बद्धता पर नहीं फैसला
बार कौंसिल ऑफ इंडिया ने सभी विश्वविद्यालयों को लॉ कॉलेज को तीन साल की एकमुश्त सम्बद्धता देने को कहा है। यह मामला विश्वविद्यालयेां और सरकार के बीच अटका हुआ है। विश्वविद्यालय अपनी स्वायत्ता छोडऩे को तैयार नहीं है।
सभी लॉ कॉलेजमें कमियों से बीसीआई वाकिफ है। अस्थाई मंजूरी के आधार पर दाखिले होते हैं। हमने तीन साल की एकमुश्त सम्बद्धता के लिए विश्वविद्यालय और सरकार को पत्र लिखा है।
डॉ. डी. के. सिंह प्राचार्य लॉ कॉलेज





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