नाडोल। कस्बे के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लंबे समय से महिला चिकित्सक को तरस रहा है। ऐसे में महिला मरीजों को मजबूरन फ ालना, बाली या पाली का रुख करना पड़ता है। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र नाडोल में कुल 5 चिकित्सक के पद स्वीकृत हैं। लंबे समय से यहां मात्र 2 या 3 चिकित्सक ही अपनी सेवाएं देते हैं। आस-पास के दर्जनों गांवों के मरीज नाडोल चिकित्सालय पर ही आश्रित हैं। इस चिकित्सालय में मौसमी बीमारियों के कारण हर रोज लगभग 150 मरीजों का आउटडोर रहता है। दानदाता रंगलालजी सोनीगरा द्वारा करोड़ों रुपए खर्च कर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र भवन का निर्माण करवाया, जिसमें 5 चिकित्सक कार्यालय, लैब, एक्सरे लैब, प्रसूति कक्ष, परामर्श कक्ष व आधुनिक सुविधा युक्त चिकित्सक, नर्सों के आवास का निर्माण करवाया गया। लेकिन प्रशासन की अनदेखी व जनप्रतिनिधियों की उपेक्षा के कारण चिकित्सालय में चिकित्सकों की पदस्थापना नहीं हो पाई। जिसमें मातृशक्ति को महिला चिकित्सक की भारी कमी खलती है। गर्भवती महिलाएं पुरुष चिकित्सक से प्रसव करवाने में असुविधा महसूस करती हैं। स्वास्थ्य केंद्र में महिला चिकित्सक की कमी के कारण प्रसूताओं को बाली, सादड़ी, रानी, पाली की राह पकडऩी पड़ती है। जिसमें गरीब परिवारों को आर्थिक नुकसान व गर्भवती महिलाओं को परेशानी का सामना करना पड़ता है। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में चिकित्सकों की कमी के कारण केंद्र व राज्य सरकारों द्वारा जनहित में जारी विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं का पूर्ण लाभ भी नहीं मिल पाता है।
चिकित्सकों की कमी है
जिले में चिकित्सकों की कमी है। मैंने उच्च अधिकारियों से चिकित्सकों की डिमांड की है। आचार संहिता के बाद चिकित्सकों की नियुक्ति होने पर नाडोल सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में महिला चिकित्सक का पदस्थापन करवा देंगे ।
डॉ. रामपाल मिर्धा, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी, पाली
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में महिला चिकित्सक का पद रिक्त होने के कारण महिलाओं को उपचार के लिए बाली या पाली जाना पड़ता है। महिलाएं स्त्री रोग के बारे में पुरुष चिकित्सक से परामर्श लेने में असुविधा महसूस करती हैं।
विनोद, कविता, मनीषा, अफ साना, ग्रामवासी, नाड़ोल





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