बीकानेर.
उत्तर पश्चिमी रेलवे ललित कला एवं राजश्री कला मंदिर की ओर से रविवार को रेलवे प्रेक्षागृह में मुंशी प्रेमचंद की कहानी सुभागी के रुपांतरण पर आधारित नाटक का मंचन किया गया। दयानंद शर्मा के निर्देशन में मंचित नाटक में कलाकारों के उम्दा अभिनय से मंच पर कहानी साक्षात साकार हो गई। कथानक के अनुसार सुभागी एक एेसी कर्मठ, स्वाभिमानी, सेवाभावी लड़की की कहानी है, जो बचपन में बाल-विधवा हो गई। बेटे ने मां-बाप को त्याग दिया, तो सुभागी बेटा बनकर अपने माता-पिता का सहारा बन जाती है। निर्देशक ग्रामीण जन-जीवन की सरलता और सहजता को खूबसूरती से मंच पर साकार किया गया।
इनकी रही भागीदारी
नाटक में रेशु माथुर, पवन आर्य, महताब खान, संतोष गौड़, पारुल जुलाहा, अंकित माथुर, शशंका रामानंद, भावना नायक, तपस्या कंवर, भावना नाई, विमल, आयुष मोदी, संगीता शर्मा, मनोज भाटी, तरुण गौड़, डॉ. निकिता गौड़ आदि ने भागीदारी निभाई।
कहानियां सच के समीप नजर आती है
बीकानेर. मुक्ति संस्था के तत्वावधान में रविवार को कहानी पाठ हुआ। हिन्दी कहानी पर त्वरित प्रतिक्रिया डॉ. असमा मसूद ने की एवं राजस्थानी कहानी पर त्वरित प्रतिक्रिया डॉ. विजयलक्ष्मी शर्मा ने व्यक्त की। विशेषज्ञ टिप्पणी डॉ. सुचित्रा कश्यप ने की। डॉ.रेणुका व्यास की कहानी पर डॉ.असमा मसूद ने कहा कि बदलते हुए जीवन मूल्यों की कहानी है। कृष्णा आचार्य की 'महारानीÓ को डॉ. विजयलक्ष्मी शर्मा ने संवेदना उकेरने वाली कहानी बताया। राजेन्द्र जोशी ने कहा कि उत्तर आधुनिकता की कहानियां सच के समीप नजर आती है।





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