बीकानेर. स्वामी केशवानंद कृषि विश्वविद्यालय परिसर स्थित खजूर अनुसंधान केन्द्र में लगाए खजूर के पौधों में फल जून में आ जाएंगे। इस फल को स्वास्थ्य के लिए गुणकारी माना जाता है। केन्द्र में इन दिनों परागण क्रिया करवाई जा रही है। इसमें नर पौधे के परागकण मादा पौधों के फूलों में निषेचित किए जाते हैं। कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार अनुसंधान केन्द्र में इस बार सात से आठ हैक्टेयर क्षेत्र में खजूर की खेती की गई है। इस माह में परागण क्रिया की जाती है, इसके बाद पूरी तरह से फूल आएंगे और जून में फल आ जाएंगे। केन्द्र में खजूर की ३४ किस्में तैयार की जा रही हैं। साथ ही खारा गांव में भी खजूर की खेती हो रही है। कृषि विश्वविद्यालय का खजूर सीजन में ५० से १०० रुपए प्रति किलो की दर से बाजार में बिकता है।
स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद
क्षेत्रीय अनुसंधान निदेशक डॉ. पीएस शेखावत के अनुसार खजूर के सेवन से दिल स्वस्थ रहता है। खजूर को रात को पानी में भिगोकर सुबह खाने से कमजोर दिल को ताकत मिलती है। खजूर में पोटेशियम होता है। एनिमिया रोग में खजूर का सेवन फायदेमंद रहता है। इसमें आयरन अधिक होता है, जो खून की मात्रा सही रखता है। हिमोग्लोबिन की भी मात्रा सही करता है। इसके अलावा कैल्सियम की कमी को दूर करने में सक्षम है। कृषि वैज्ञानिकों ने बताया कि इसे खाने से शरीर को ऊर्जा मिलती है। ताजा खजूर नरम होता है, जिसे पचाना आसान होता है। इसमें ग्लूकोज होने से शरीर में ताजगी रहती है। खजूर को विशेषकर सर्दियों का फल कहा जाता है और दूध के साथ सेवन करने से फायदा मिलता है।
अधिकारियों ने किया निरीक्षण
स्वामी केशवानन्द राजस्थान कृषि विश्वविद्यालय के अनुसंधान निदेशक डॉ. एसएल गोदारा, क्षेत्रीय अनुसंधान निदेशक डॉ. पीएस शेखावत, कृषि अनुसंधान केन्द्र के उपनिदेशक डॉ. योगेश शर्मा, सह उपनिदेशक डॉ. एसएम कुमावत ने मंगलवार को खजूर अनुसंधान केन्द्र का निरीक्षण किया। डॉ. एआर नकवी व डॉ. राजेंद्र सिंह राठौड़ ने उन्हें खजूर फार्म का भ्रमण करवाया।





No comments:
Post a Comment