जैसलमेर।
राजस्थान में एक बार फिर तापमान बढ़ने लगा है। प्रदेश के जैसलमेर जिले में गर्मी से बुरा हाल है। जिलेभर में भीषण गर्मी ने अब प्रचंड रुप धारणा करना शुरू कर दिया है। पारा 42 डिग्री के पार पहुंचने से लोगों का जीना दुश्वार हो गया है। रेगिस्तानी क्षेत्र होने के कारण यहां की एक बड़ी समस्या भी है जो गर्मी में और भी बड़ा रूप ले लेती है..वो है पानी की समस्या। यहां के लोगों को खाने से ज्यादा पानी पर खर्च करना पड़ता है।
जिले में गर्मी की बात करें तो, शहरी व ग्रामीण क्षेत्रों में इन दिनों गर्मी के कारण जन जीवन प्रभावित हुआ है। मंगलवार को सूर्यदेव ने तल्खी दिखाई और पारा अधिकतम 42.7 डिग्री सेल्सियस पहुंच गया, जिससे गर्मी का असर बढ़ गया। इस दौरान न्यूनतम तापमान 25.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। चिलचिलाती धूप व तन झुलसाने वाली उमस में राहगीरों का चलना मुश्किल हो गया। शहरी व ग्रामीण क्षेत्रों में गत एक सप्ताह से गर्मी में हो रही बढ़ोतरी से जनजीवन प्रभावित हुआ है।
वहीं, गर्मी की समस्या के साथ ही पानी की कमी होने से भी यहां परेशानी बढ़ा रही है। जैसलमेर के फतेहगढ़ उपखंड के राजस्व ग्राम सांधुवा में भानाराम की ढाणी व शोभाराम की ढाणी, गांव कोडियासर में दर्जियों की ढाणी, टीकमोणियों की ढाणी में ग्रामीणों को हर महीने बड़ी धन राशि पानी पर खर्च करनी पड़ रही है।
कोडियासर में पुराना सरकारी नलकूप खराब हो जाने पर ग्रामीणों ने जिला कलेक्टर, जलदाय विभाग व तहसीलदार को ज्ञापन देने पर विभाग की ओर से दूसरा नलकूप खुदवाया, लेकिन कार्य पूरा होने के छह माह बाद भी अभी तक पानी की आपूर्ति नहीं हो पाई है।
डेढ़ वर्ष सूखी पड़ी है सरकारी जीएलआर
गांव के भानाराम की ढाणी में 20 घर, दर्जियों की ढाणी में करीब 50 से 60 घर, शोभाराम की ढाणी में 20 घर है। जलदाय विभाग ने इन घरों के लिए जीएलआर बना रखी है। जीएलआर डेढ़ साल से सूखी पड़ी है। जीएलआर में पक्षियों ने अपने घौंसले बना रखे हैं । ग्रामीणों को 700 रुपए खर्च कर पानी की व्यवस्था करनी पड़ती है। ग्रामीणों के अनुसार पानी की समस्या के दौरान स्थानीय लोग अपने पीने का पानी टंकियों से डलवाते हैं।





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