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कम्प्यूटर, इंटरनेट युग के बावजूद जारी है पुस्तक प्रेम

-23 अप्रेल विश्व पुस्तक दिवस पर विशेष

समय के साथ भले ही बहुत कुछ बदल गया। कम्प्यूटर, इंटरनेट युग आ गया लेकिन पाठकों का पुस्तक प्रेम जारी है। साहित्य के प्रति रुझान रखने वाले पुस्तक को 'प्राण’ तक मानते हैं। प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी करने वाले युवाओं के अलावा ऐसे लोग बड़ी संख्या में है जो पुस्तकों से अगाध प्रेम रखते हैं।

जिला मुख्यालय के राजकीय पंडित दीनदयाल उपाध्याय सार्वजनिक जिला पुस्तकालय में प्रत्येक कार्य दिवस में पुस्तक प्रेम स्पष्ट नजर आता है। हर समय काफी संख्या में युवा एवं अन्य लोग पुस्तक पढ़ते मिलते हैं। कई बार तो ऐसा भी होता है, जब एक भी कुर्सी खाली नहीं रहती। इस पुस्तकालय में विभिन्न तरह की 50 हजार से अधिक उपयोगी पुस्तके हैं। गत वित्तीय वर्ष में 1328 पाठक पंजीकृत थे, चालू साल के प्रथम पखवाड़े में इस संख्या में 200 की बढ़ोतरी तो हो चुकी और यह जारी है।

दृष्टिबाधित कॉर्नर भी इस पुस्तकालय में बनाया गया है। इसमें दृष्टिबाधितों के लिए ब्रेल लिपि में पुस्तके हैं वहीं सुनने के लिए हेडफोन, साफ्टवेयर-हॉर्डवेयर की व्यवस्था भी है। इसमें स्टाफ जरूर कम है लेकिन प्रयास जारी रखने से इन दिनों काफी काम हुए हैं। नगर विकास न्यास, उद्यमी विजय कुमार गोयल आदि के सहयोग से अनेक कार्य पूरे हुए हैं, बाहरी दीवार पर रंग-रोगन का काम जारी है।

स्मृति में मनाया जाता है दिवस
विश्व पुस्तक एवं कॉपीराइट एक्ट दिवस महान साहित्यकार शेक्सपियर की स्मृति में मनाया जाता है। उनकी 23 अप्रेल 1616 को मृत्यु हुई थी। साहित्य के क्षेत्र में अविस्मरणीय योगदान देने वाले शेक्सपियर की स्मृति को अक्षुण्ण रखने के लिए यूनेस्को ने इस दिन को विश्व पुस्तक एवं कॉपीराइट एक्ट दिवस में रूप में मनाने का निर्णय किया था।

'शब्द ब्रह्म है, पुस्तकों से प्रेम जारी रहेगा। जिला पुस्तकालय में इसे बढ़ाने के लिए समय-समय पर गोष्ठियां एवं अन्य कार्यक्रम होते रहते हैं, सभी का सहयोग मिलता है’ -डॉ. रामनारायण शर्मा पुस्तकालयाध्यक्ष



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