सुजानगढ़. राज्य का परिवहन विभाग सार्वजनिक यात्री वाहनों में महिलाओं को अपहरण, दुष्कर्म, छेड़छाड़ सहित अन्य वारदातों से बचाने के प्रति उदासीन है। यहां बता दें कि विभाग ने सार्वजनिक यात्री वाहनों में पैनिक बटन व व्हीकल लोकेशन ट्रेकिंग डिवाइस लगाने की योजना तो बना दी। मगर योजना की शुरुआत से पहले ही इस पर दो बार रोक लगाईजा चुकी है। ऐसे में सार्वजनिक यात्री वाहनों में महिलाएं खुद को असुरक्षित महसूस करती हैं। योजना के तहत एक जनवरी 2019 के बाद पंजीकृत बसों, टैक्सी आदि सार्वजनिक वाहनों में पैनिक बटन व व्हीकल लोकेशन टे्रकिंग डिवाइस लगाया जाना जरूरी था। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय (मोर्थ) ने यात्री वाहनों में पंजीयन के समय ही दोनों उपकरण लगाने की अनिवार्यता लागू की थी। परिवहन आयुक्तालय ने भी आदेश जारी किए थे। लेकिन योजना को आगे गति नहीं मिल पाई। परिवहन विभाग के अधिकारियों का कहना था कि जनवरी से पंजीकृत होने वाले ऐसे सभी वाहनों में दोनों उपकरण लगाने की योजना थी। बाद में धीरे-धीरे पुराने वाहनो में भी लगाना था। जिससे महिलाओं के साथ होने वाली वारदातों पर काफी हद तक अंकुश लगता। लेकिन पहले इस पर मार्च तक रोक लगा दी। मार्च खत्म होने के बाद रोक मई तक बढ़ा दी गई है।
संयुक्त परिवहन आयुक्त (नियम) ने डिवाइस लगाने की इस योजना पर मई तक रोक लगा दी है। अब उच्चाधिकारियों से नए आदेश मिलने पर उसी के मुताबिक काम शुरू किया जाएगा।
राजेश स्वामी, जिला परिवहन अधिकारी, सुजानगढ़
परिवहन विभाग को अपनी रोक हटाकर यात्री वाहनों पर महिलाओं की सुरक्षा संबंधी नई व्यवस्था जल्द लागू करनी चाहिए। ताकि महिलाओं को वाहनों मेें समुचित सुरक्षा मिल सके।
सरला पांडे, मंत्री, उपभोक्ता संरक्षण समिति, सुजानगढ़





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