कम और ज्यादा नींद दोनों से होता नुकसान
कम नींद और सात-आठ घंटे से ज्यादा की नींद दोनों ही स्वास्थ्य के लिए ठीक नहीं। 6-7 घंटे से कम नींद से टाइप 2 डायबिटीज, हृदय रोग और अवसाद हो सकता है। वहीं 10-12 घंटे की नींद मधुमेह, हृदय रोग, मोटापे, अल्जाइमर व मनोरोग का खतरा बढ़ाती है। यदि कोई 85 वर्षीय व्यक्ति दस-बारह घंटे सोता है और वह हर दिन एक घंटा कम सोए तो उसे कामकाज के लिए साढ़े तीन साल का अतिरिक्त समय मिल जाएगा। एक अनुमान है कि दुनियाभर में दो प्रतिशत लोग लॉन्ग स्लीपर्स है।
50 वर्ष वालों के लिए 7-8 घंटे की नींद अच्छी
अमरीकन विशेषज्ञ राफेल पेलायो मानते हैं कि लम्बी नींद का कारण आनुवांशिक हो सकता है। सिएटल के एक स्लीप मेडिसिन विशेषज्ञ नथानिएल वाटसन कहते हैं कि अत्यधिक नींद स्वास्थ्य के लिए खराब है। ज्यादा नींद लेने से रोग प्रतिरोधक क्षमता प्रभावित होती है। अमरीकन एकेडमी ऑफ स्लीप मेडिसिन के अनुसार 10-12 घंटे सोने वालों को स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से इंकार नहीं किया जा सकता है। जीवनकाल पर भी असर पड़ता है।
ज्यादा सोने से ये होता असर
स्लीप रिसर्च सोसाइटी के विशेषज्ञों ने 2015 में बताया था कि सात-आठ घंटे की नींद अच्छी होती है। एसोसिएट प्रोफेसर नेओमी शाह कहते हैं कि लंबी नींद मधुमेह, हृदय रोग, मोटापा, अल्जाइमर व मनोरोग से जुड़ी हो सकती है। एरिजोना स्टेट यूनिवर्सिटी और फीनिक्स वीए हैल्थ केयर सिस्टम के शोधकर्ता शॉन यंगस्टेड के अनुसार लम्बी नींद क्यों आती है, यह अध्ययन का विषय है। दस-बारह घंटे सोने से सेहत पर असर पड़ता है।
पांच चक्र में आती है नींद
नींद पांच चक्र में आती है। एक सर्किल 90 से 120 मिनट का होता है। ताजगी महसूस करके लिए हमें हर रात कम से कम तीन सर्किल गहरी नींद लेनी चाहिए। गहरी नींद नहीं आती है तो लोग लंबी नींद लेने की कोशिश करते हैं। ऐसे में स्लीप एप्निया की समस्या भी हो सकती है। ज्यादा लम्बी नींद से मोटापा, हृदय रोग व अन्य समस्याएं हो सकती हैं।
डॉ. शुभ्रांशु, श्वास एवं निद्रा रोग विशेषज्ञ





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