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आठ किलोमीटर पैदल चलकर करने आते हैं मतदान, लेकिन चुनाव जीतने के बाद नहीं जाता कोई गांव

खण्डार. लोकसभा चुनाव में शत प्रतिशत मतदान करने को लेकर एक ओर निर्वाचन विभाग विभिन्न प्रकार की योजनाएं व कार्यक्रम कर रहा है, लेकिन लोकसभा क्षेत्र व विधानसभा क्षेत्र के मतदान केन्द्रों पर मतदाताओं को आने वाली परेशानी की ओर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है। इससे मतदान पूरा नहीं होता हैं।
ऐसा ही मामला है विधानसभा क्षेत्र के बूथ संख्या 218 का। यहां पर मतदाता करीब आठ किलोमीटर पैदल चल कर मतदान करने आते हैं।
मतदाताओं के लिए मतदान केन्द्र पर कोई सुविधा नहीं हैं। मतदाता पानी के लिए तरसते हैं। बिजली की कोई सुविधा नहीं है। इससे लोगों को गर्मी में मतदान करने में समस्या होती है।


बदहाल है क्षेत्र की स्थिति
रणथम्भौर के अंतर्गत विस्थापित क्षेत्र में आने से क्षेत्र की स्थिति बदहाल है। पंचायत मुख्यालय के जुड़े गांवों में सड़क नहीं है, बिजली ईद के चांद की तरह आती है। पीने के पानी के लिए लोगों को जंगल में बने कुओं पर जाना पड़ रहा है।


पहली बार किया मतदान
ग्रामीणों ने बताया कि बूथ संख्या 217 व 218 पर ग्रामीणों ने पहली बार मतदान किया है। पूर्ववर्ती सरकार में पंचायत खिदरपुर जौदान बनी। इससे पहले करीब आठ गांवों के लोग डूंगरी ग्राम पंचायत में मतदान करने जाते थे। विधान सभा व लोक सभा के मतदान करने के लिए बिजपुरी पंचायत के बाजोली गांव में जाकर मतदान करते थे।


बूथ क्रमांक- 217
शामिल गांव- कराडकी, म्हारो, लुढावणी, देवपुरा आदि
मतदाता 1192
मतदान प्रतिशत- विधानसभा चुनाव में 40 से 45
लोकसभा चुनाव में 30 प्रतिशत
बूथ क्रमांक- 218


शामिल गांव- डांग भावपुर, तालड़ाखेत आदि
मतदाता 566
यह है परेशानी- मतदान के लिए करीब आठ किलोमीटर पैदल चलना पड़ता है
मतदान प्रतिशत- विधानसभा चुनाव में 40 से 45
लोकसभा चुनाव में 30 प्रतिशत


ये बोले लोग
ग्राम पंचायत के एक ओर बनास नदी है। दूसरी ओर रणथम्भौर अभयारण्य है। बारिश के दौरान बनास नदी में पानी अधिक आ जाने पर पंचायत के लोग तहसील व जिला मुख्यालय से कट जाते हैं।
मदनमोहन शर्मा, निवासी भावपुर


क्षेत्र का आज तक कोई विकास नहीं हुआ हैै। इससे क्षेत्र आजादी के बाद भी पिछड़ा हुआ है। गांव में डिस्पेंसरी नहीं होने से रोगियों व प्रसूताओं को दिक्कत आती है। प्रत्याशी चुनाव में वोट मांगने आते हैं। बाद में देखते नहीं।
सियाराम गुर्जर, निवासी लुढावणी


ग्राम पंचायत क्षेत्र में शिक्षा, स्वास्थ्य, चिकित्सा के कोई साधन नहीं हैं। तहसील मुख्यालय के लिए कोई सड़क नहीं है। जनप्रतिनिधि वोट मांगने आते हैं, लेकिन क्षेत्र का विकास कोई नहीं करवाता।
मथुरया गुर्जर, निवासी डांग भावपुर


पूर्ववर्ती सरकार ने तो ग्रामीणों की सुध लेते हुए नई ग्राम पंचायत बनवाई। इससे पहले लोग डूंगरी तक पैदल जाकर वोट डालते थे। पहली बार ग्राम पंचायत को बिजली भी पूर्व सरकार के प्रयासों से ही मिल पाई।
भरत शर्मा, निवासी भावपुर



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