उद्यान उजड़े, बच्चे गर्मी में कहां करें सैर?
- नगर परिषद उद्यानों के रखरखाव को लेकर नहीं दे रही ध्यान
बालोतरा.
नगर में उजड़े उद्यानों पर बच्चे खेलने, मनोरंजन तो बड़े-बुजुर्ग सैर,सपाटे को तरस गए हंैं। लंबे समय से उद्यान बदहाल है, लेकिन नगर परिषद ने मानो इसकी देखरेख से मुंह ही फेर लिया है। इस पर उजड़े, बदहाल उद्यान शहरवासियों का मुंह चिढ़ा रहे हंै। इससे आमजन में रोष है।
नगरवासियों के सैर व मनोरंजन के लिए कई वर्ष पूर्व नगर परिषद ने महावीर पार्क, नेहरू उद्यान, वृंदावन उद्यान, गांधी उद्यान आदि कइयों के निर्माण पर लाखों रुपए खर्च किए थे। कईवर्ष तक इनकी सही देखरेख व संचालन किया। इससे सुबह-शाम सैर व मनोरंजन को लेकर बड़ों व बच्चों को अच्छी सुविधा मिलती रही, लेकिन इसके बाद नगर परिषद ने इनके देखरेख से ही मुंह मोड़ लिया है। इस पर लंबे समय से उद्यान उजड़े हुए हंै। एक भी उद्यान में दूब नहीं है। झूले सड़-गल व टूट गए। जगह-जगह कचरा व गदंगी बिखरी हुई है। इस पर शहरवासी इनमें घूमना फिरना व बच्चे खेलने व मनोरंजन के लिए यहां आना तो दूर इसकी ओर झांककर तक नहीं देखते हंै। आमजन लंबे समय से उद्यानों के रखरखाव व संचालन की जरूरत महसूस कर रहा है, लेकिन नगर परिषद इस ओर कोई ध्यान नहीं दे रही है। इससे गर्मी में सुबह-शाम सैर करने तो विद्यालय अवकाश पर इनमें खेलने, कूदने, मनोरंजन करने को लेकर बड़े व बच्चे तरस गए हैं। नगर परिषद के रखरखाव में ध्यान नहीं देने से आमजन व बालकों में रोष है।
एक भी उद्यान नहीं सही, कहां जाएं शहर- विद्यालय अवकाश हो गए हैं। इस पर उद्यानों में खेलने-कूदने व मनोरंजन की इच्छा रखते हंै,लेकिन एक भी उद्यान सही नहीं है। इससे बहुत परेशान है। इस पर टीवी देख कर व इण्डोर खेल कर मनोरंजन करते, समय बिताते हैं। - योगेश दवे
सभी पार्क बदहाल, नगरपरिषद नहीं दे रही ध्यान- शहर के सभी उद्यान उजड़े हुए हैं। दूब जली है तो झूले सड़-गल कर टूट गए। जगह-जगह गंदगी है। दूषित माहौल पर इनकी ओर कोई झांक कर नहीं देखता। नगर परिषद उद्यानों की देखरेख करें, इससे बच्चे मनोरंजन व बड़े सैर कर सकें। - शंकरलाल जैन





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