अब विद्यार्थी के वार्षिक रिपोर्ट कार्ड में सभी विषयों की ग्रेड सहित उनमें आत्मविश्वास और पहल, सहयोग व देखभाल, समय की पाबंदी और व्यायाम के बारे में उल्लेख किया जाएगा। सतत तथा व्यापक मूल्यांकन आधारित पाठ्यक्रम (सीसीई) आधारित विद्यालयों में कक्षा 6 और 9 वीं के विद्यार्थियों की अंकतालिका में मुख्य विषयों की ग्रेड के साथ सहयोग व देखभाल, आत्मविश्वास और पहल, समय की पाबंदी, पोषण व स्वास्थ्य की स्थिति, व्यायाम में रुचि, खेल के प्रति उत्साह, कला शिक्षा, संगीत, चित्रकारी व दस्तकारी, नाटक, नृत्य व अभिव्यक्ति की स्थिति का भी उल्लेख होगा।
यह नया प्रयोग अलवर सहित जयपुर, डूंगरपुर, उदयपुर और बीकानेर जिले में होगा। यह नवाचार उन ब्लॉकों में शुरू होगा जिनमें पहले से ही सरकारी विद्यालयों में सीसीई आधारित पाठ्यक्रम चल रहा है।
अलवर जिले के थानागाजी व उमरैण ब्लॉक के ३१४ विद्यालयों में यह पाठ्यक्रम चल रहा है। इस बार उच्च प्राथमिक कक्षाओं की वार्षिक अंकतालिका में इनका उल्लेख होगा। इसी प्रकार कक्षा आठवीं के विद्यार्थियों को अंकतालिका डाइट के माध्यम से उपलब्ध होंगी।
ग्रेड होगा आधार-
इन कक्षाओं में ए, बी और सी तीन ग्रेड दी जाएंगी। ए ग्रेड का अर्थ स्वतंत्र रूप से कार्य कर पाना या दक्षता होना, बी ग्रेड में शिक्षक की सहायता से कार्य कर पाना तथा सी ग्रेड का अर्थ शिक्षक की विशेष सहायता से कार्य कर पाना है। इसी प्रकार इस रिपोर्ट कार्ड में विद्यार्थी की उपस्थिति को भी दर्शाया जाएगा जिसमें ७० प्रतिशत से अधिक उपस्थिति को नियमित, ५० से ७० प्रतिशत उपस्थिति को मध्यम स्थिति तथा ५० प्रतिशत से कम उपस्थिति को अनियमित स्थिति माना जाएगा।
विद्यार्थी के सर्वांगीण विकास पर ध्यान-
मुख्य जिला शिक्षा अधिकारी लक्ष्मीनारायण पारीक का कहना है कि विद्यार्थी को किताबी शिक्षा के साथ उसका सर्वांगीण विकास हो, इसके लिए यह पहल की गई है। इससे विद्यार्थी किताबी शिक्षा के साथ अन्य बातों पर ध्यान देगा।
क्या है सीसीई-
सतत व व्यापक मूल्यांकन (सीसीइ ) को २००९ में प्रारम्भ किया गया था। इसे पहले सीबीएसई ने प्रारम्भ किया था लेकिन कुछ सालों में ही इसे हटा लिया गया है। सतत तथा व्यापक मूल्यांकन का अर्थ विद्यार्थियों के विद्यालय आधारित मूल्यांकन की प्रणाली जिसमें उनके विकास के सभी पक्ष शामिल हैं। यह निर्धारण के विकास की प्रक्रिया है जिसमें दोहरे उद्देश्यों पर बल दिया जाता है। ये उद्देश्य व्यापक आधारित अधिगम और दूसरी ओर व्यवहारगत परिणामों के मूल्यांकन तथा निर्धारण की सततता में हैं।
इस विशाल लक्ष्य को व्यवहार में लाने का प्रयास किया।के बारे में और अधिक सजग हो जाते हैं तथा उनकी अपने अधिगम को नियमन करने में सक्षम बनते हैं।
इस योजना में सतत का अर्थ विद्यार्थियों की वृद्धि और विकास के अभिज्ञात पक्षों का मूल्यांकन करने पर बल देना है। व्यापक का अर्थ है कि इस योजना में विद्यार्थियों की वृद्धि और विकास के शैक्षिक तथा सह-शैक्षिक दोनों ही पक्षों को शामिल करने का प्रयास किया जाता है।





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