शिश्यंू सरकार विद्यालय के विद्यार्थियों की थाली का स्वाद दिन-प्रतिदिन बदल रही है। वहीं उनका पोषाहार बनाने वाले पिपराली ब्लॉक के 382 कुक कम हेल्पर की तरफ कोई ध्यान नही दे रही है। वे आज भी न्यूनतम मजदूरी को तरस रहे है। विभाग सिर्फ 1320 रुपए मासिक मेहनताना दिया जा रहा है। महिने में सरकारी छुट्टियां होने से जनवरी में 800, नवम्बर में 700, दिसम्बर में 1100 रुपए ही मिलते हैं। ऐसे में उन्हें आजीविका चलाने में मुश्किल का सामना करना पड़ रहा है। महंगाई के साथ खर्चा भी बढ़ता जा रहा है। गौरतलब है कि सरकारी विद्यालयों में विद्यार्थियों की उपस्थिति व नामांकन बढ़ाने, ड्रॉप आउट रोकने, शिक्षा के स्तर को बढ़ावा देने तथा पोषण में वृद्धि करने के लिए मिड-डे मील की शुरुआत की गई थी। इसके तहत कक्षा एक से आठवीं तक के विद्यार्थियों को मध्यान्तर में पोषाहार खिलाया जाता है। पांचवी तक के विद्यार्थियों को 450 ग्राम कैलारी व करीब 12 ग्राम प्रोटीन तथा छठी से आठवीं के विद्याथियों को 750 ग्राम कैलोरी व 20 ग्राम प्रोटीन उपलब्ध करवाया जाता है।
विद्यालयों में 50 विद्यार्थियों पर एक कुक कम हेल्पर रख सकते हंै। इसके अलावा 50 से 150 तक दो तथा 151 से 450 तक तीन हेल्पर रख सकते हैं। पांचवी तक के विद्यार्थियों को 100 ग्राम तथा छठी से आठवीं तक के विद्यार्थियों को 150 ग्राम मिड-डे मील उपलब्ध कराया जाता है। इसके साथ एक सितम्बर से पांचवी तक विद्यार्थियों को 150 एमएमल तथा छठी से आठवीं तक 200 एमएमल प्रतिदिन दूध भी उपलब्ध कराया जाने लगा है, जिससे कुक कम हेल्पर का काम दोगुना हो गया है।
सरकारी विद्यालयों में कक्षा एक से आठवीं तक अध्ययन करने वाले विद्यार्थियों को प्रतिदिन अलग-अलग मैन्यू के हिसाब से पोषाहार मिलता है। सोमवार को रोटी-सब्जी, मंगलवार को दाल-चावल, बुधवार को दाल-रोटी, गुरूवार को खिचड़ी , दाल-चावल, शुक्रवार को दाल रोटी , शनिवार को रोटी-सब्जी दी जाती है। इसके साथ ही प्रतिदिन दुध व सप्ताह में एक बार फ ल उपलब्ध कराया जाता है।
1320 रुपए में कैसे चले घर
कुक कम हेल्परों को कहना है कि 1320 रुपए में घर खर्च नहीं चल पाता है। किसी माह में कार्य दिवस 15 हुए तो 660 रुपए का ही भुगतान हो पाता है। वर्तमान में गांवों में मजदूरों को भी करीब 300 रुपए मजदूरी दी जाती है, लेकिन कुक कम हेल्पर न्यूनतम मजदूरी को तरस रहे हैं। कुक कम हेल्परों को 12 में से 10 माह का ही भुगतान होता है। वहीं पर प्रतिदिन औसत मजदूरी की बात करे तो 44 रूपए ही मिल रहे हैं।
इनका कहना है...
कुक कम हेल्पर का मानदेय 2018 से पहले 1200 रूपये मिलते थे। जुलाई 2018 से 10 प्रतिशत बढ़ाकर 1320 रूपए किये गए है। इनका मानदेय बढ़ाना सरकार का काम है।
बनवारी लाल, सीबीइओ पं.स. पिपराली





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