- चैनराज भाटी
सेठजी की मौज...
पाली। टोपी वाले महकमे में जिसके रामा-श्यामा बढ़ जाए तो उसकी मौज हो जाती है। मुख्यालय के भीतरी शहर में बने ठिकाणे में कपड़ा इधर-उधर होने का मामला चल रहा था। एक सेठजी गायब थे। खूब हल्ला मचा, सेठजी को गुपचुप रात को लाए और सुबह पेश कर दिया। किसी को कानो-कान खबर नहीं लगी। पहले भी इस मामले में दो जनों को लाए, तब खूब ढोल बजाया था। सेठजी को इस तरह लाकर ले जाना, पचा नहीं। सुरसरी है कि सेठजी भी पहुंच वाले थे, इसलिए खबर नहीं लगी। दूसरे दिन बात उजागर हुई तो किसी के पास जवाब नहीं था। मान गए ठिकाणे के तीन स्टार वाले साहब को, कभी-कभार तो हद ही कर देते हैं।
नमक ही नमक
सीमेंट फैक्ट्री वाले इलाके में दो स्टार वाले साहब रेत के चक्कर में आंखों में आ गए। सबकुछ ठीक-ठाक चल रहा था, किसी को खबर तक नहीं थी। बस खुद के ही नुमाइंदे कुछ ज्यादा ही ताव में आए गए और जनता को ही पटकना शुरू कर दिया। फिर क्या, खुल गई पोल, गलियारों में सबकुछ उजागर हो गए साहब के कारनामे। रात में सुरा के लिए आपके ठिकाणा क्षेत्र में लाइन लगती है, यह भी बात उजागर हो गई है। साहब, आटे में नमक डालने की कहावत तो सुनी है, यहां तो...।
हाय रे गर्मी
ये गर्मी गजब की है, अब चाहे आसमान में हो या दिमाग में, जहां भी रहती है, तकलीफ ही करती है। गोडवाड़ में करंट वाले पूर्व मंत्रीजी के मुख्यालय पर सर्किल के युवा साहब एक दिन गर्मी से परेशां हो गए। दिनभर मेले में पैदल चल रहे थे, इस बीच चोरों ने एक दुकान में शोर मचा दिया। साहब को किसी ने पूछ लिया क्या हुआ, फिर क्या। साहब ने पूरी तपन ही बाहर निकाल ली। अरे साहब, यह गर्मी है, इसे चोरों पर निकालोगे तो काम आएगी। बेवजह हल्ला मचाओगे तो बात बढ़ जाएगी। आए दिन चोर सर्कल एरिया में शोर मचा रहे हैं, रात को ठण्डी हवा में निकला करो। गर्मी भी नहीं लगेगी और चोर भी हाथ लग जाएंगे।





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