बीकानेर. रामपुरा बस्ती निवासी सुशील बिश्नोई का आइएएस में १०६वीं रैंक पर चयन हुआ है। वे अभी कृषि वैज्ञानिक हैं और उत्तराखण्ड के अलमोड़ा में कार्यरत हैं। सुशील ने पत्रिका से बातचीत में कहा कि निरंतर तैयारी में जुटे रहने से एक दिन सफलता जरूर मिलती है। सिविल सर्विसेज में सफलता के लिए तैयारी के सवाल पर सुशील ने कहा कि यूपीएससी परीक्षार्थी के प्रयास करने की सीमा की परीक्षा लेता है। एेसे में एक-दो बार में विफल होने के बाद निराश नहीं होना चाहिए, बल्कि और ज्यादा मनोबल से तैयारी करनी चाहिए। सुशील ने बताया कि उनके पिता गणपतराम आरएएसी में हवलदार हैं और उदयपुर में कार्यरत हैं। माता गृहिणी हैं। छोटी बहन प्रियंका और छोटा भाई हरीश अभी पढ़ाई कर रहे हैं।
पहली बार २०१५ में दी परीक्षा: सुशील ने बताया कि उन्होंने पहली बार २०१५ में आइएएस की परीक्षा दी। तीसरे प्रयास में २०१७ में साक्षात्कार तक पहुंचे, लेकिन अंतिम चयन सूची में स्थान नहीं मिला। इस बीच २०१८ में उनका चयन भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद में बतौर कृषि वैज्ञानिक के रूप में हो गया। उन्होंने सफलता का श्रेय आइपीएस प्रेमसुख डेलू, आरएएस श्यामसुन्दर बिश्नोई, एयरफोर्स ऑफिसर कैलाश पूनिया, व्याख्याता गोपाल ज्याणी, आइआरएस दिनेश खींचड़ और माता-पिता को दिया। जिन्होंने लगातार प्रयास करते रहने के लिए प्रेरित किया।
किसान परिवार से हैं दलीप धत्तरवाल
लूणकरनसर. भारतीय प्रशासनिक सेवा परीक्षा-२०१८ के शुक्रवार को घोषित परिणाम में लूणकरनसर तहसील के सुलेरां गांव के दलीप कुमार धत्तरवाल ने ७३वीं रैंक हासिल की है। आइएएस में चयनित दलीप कुमार का पहले आइपीएस में चयन हो चुका है तथा वर्तमान में प्रशिक्षु के तौर पर सेवाएं दे रहे हैं। दलीप कुमार किसान परिवार से ताल्लुक रखते हैं।





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