-कस्बे में प्रतिदिन गणगौर का बिंदौरा निकालती हैं महिलाएं
-पूजन के प्रति श्रद्धा व उत्साह
गजसिहपुर.
गणगौर पूजन के उपलक्ष में महिलाएं घरों में ईसर गणगौर का बिंदौरा निकालने की परम्परा का निर्वहन कर रही है। यहां शिव पार्वती स्वरूप इसर गणगौर की प्रतिमाओं की आस्था से पूजा होती है । शाम को महिलाएं और कन्याएं गणगौर से जड़े गीत गाती हुई मंदिरों और घरों में जाती हैं। यहां उनकी खूब आवभगत होती है। पंडित इंद्र कुमार शर्मा ने बताया की पर्व के मद्देनजर मिट्टी से बनाई प्रतिमाओं को श्रंगारित कर सजाया जाता है।
गणगौर पूजन करने वाली सरोज जाजू, सीमा शर्मा, सुमन जैन, कीर्ति बाहेती आदि का समूह प्रतिदिन शाम को गीत गाते हुए श्री सत्यनारायण मंदिर और विभिन्न घरों में जाकर बिंदौरा निकालता हैं। इस परम्परा के निर्वहन में सहयोगी सपना पेड़ीवाल,सोनिया पेड़ीवाल, गौरी, अनिता पेड़ीवाल, सरोज, संतोष पेड़ीवाल, रेनू शर्मा, मंजू शर्मा, गायत्री शर्मा आदि विभिन्न प्रचलित गीत ‘गवर गणगौर माता खोल किवाड़ी’, ‘भंवर म्हाने पूजन दयो गणगौर’ आदि गीत गाती हैं। बिंदौरा निकालने वाले परिवार की ओर से श्रद्धालु महिलाओं को जलपान करवाया जाता है। सुबह पूजन और शाम को घरों में बिंदोरा निकालने का सिलसिला शुक्ल पक्ष की दूज तक जारी रहेगा। पंडित इन्द्र शर्मा के अनुसार अंतिम दिन गणगौर की सवारी श्री सत्यनारायण मंदिर से धूमधाम के साथ निकाली जाएगी। यह नगर परिक्रमा करते हुए पुराने कुएं पर जाएगी वहां पूजन होगा।





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