जयपुर. जयपुर डिस्कॉम में स्मार्ट मीटर लगाने से जुड़े एक जैसे कार्य के लिए अलग-अलग दर पर कार्यादेश जारी करने और डिस्ट्रीब्यूशन ट्रांसफार्मर रीडिंग कार्यादेश सौंपने से पहले बेहतर तरीके से नेगोशिएशन नहीं होने का मामला सामने आया है। डिस्कॉम के 500 करोड़ रुपए से ज्यादा के काम सरकार की जांच के दायरे में आने के बाद डिस्कॉम की ओर से मंत्रिमण्डलीय उप समिति को भेजी गई तथ्यात्मक रिपोर्ट में यह तथ्य सामने आए हैं। स्मार्ट मीटर से जुड़ी एक निविदा में 10 प्रतिशत ज्यादा दर पर काम दिया गया है, जिस पर डिस्कॉम प्रशासन ने ही सवाल उठा दिए हैं। सूत्रों के मुताबिक इसमें स्मार्ट मीटर से जुड़ा काम निरस्त हो सकता है।
ये काम हैं जांच के दायरे में
जयपुर-टोंक में लगने हैं मीटर
इसमें जयपुर शहर और टोंक जिले के आधे हिस्से में स्मार्ट मीटर लगाए जाने हैं। 2,63,232 मीटर सिंगल फेज पर और 17540 थ्री फेज पर लगाए जाएंगे। इसमें जयपुर शहर के बाहरी इलाके चिह्नित किए गए हैं, जिसमें जगतपुरा, भांकरोटा, पृथ्वीराज नगर, मुहाना, सीकर रोड, आगरा रोड सहित अन्य इलाके हैं।
5 जिलों में होना है काम
इसमें 5 जिलों में स्मार्ट मीटर लगाए जाने हैं। इनमें 1 लाख 35 हजार सिंगल फेज और 12544 थ्री फेज के उपभोक्ता शामिल हैं। इसमें पहले उन उपभोक्ताओं को चिन्हित किया गया है, जहां विद्युत खपत ज्यादा हो या फिर लॉस ज्यादा है। लागत 118.42 करोड़ रुपए है।
लगाए जाने हैं अत्याधुनिक मीटर
इसमें डिस्ट्रीब्यूशन ट्रांसफॉर्मर पर ही अत्याधुनिक मीटर लगाए जाने हैं। डिस्ट्रीब्यूशन ट्रांसफॉर्मर पर 41 हजार और 25 हॉर्स पॉवर की क्षमता से उपर वाले 50 उपभोक्ता शामिल हैं। इनमें बड़े उद्योग व कई बड़े होटलों को भी लिया गया है, जहां ज्यादा बिजली खपत हो रही है। जयपुर के अलावा नगर पालिका से जुड़े हुए सभी शहर और 5 हजार से ज्यादा आबादी वाले गांव शामिल हैं। लागत 195.46 करोड़ रुपए है।
पूर्व सरकार के कार्यों की जांच
पिछली भाजपा सरकार के कार्यकाल के अंतिम छह माह में जयपुर डिस्कॉम ने तीन कार्यादेश जारी किए। इनमें जयपुर समेत बारह जिलों में 4.29 लाख स्मार्ट मीटर लगाने से लेकर ऑटोमेटिक मीटर रीडिंग के लिए डिस्ट्रीब्यूशन ट्रांसफार्मर पर मीटर लगाने का काम होना है। कांग्रेस सरकार ने अग्रिम आदेश तक इन पर रोक लगाते हुए डिस्कॉम प्रशासन से जांच रिपोर्ट मांगी। मंत्रिमण्डलीय उप समिति को आशंका थी कि इन कार्यों में अनियमितता हो सकती है।
ऐसे लुटाया सरकारी खजाना
स्मार्ट मीटर: 71 नम्बर का पहला टेंडर 193.75 करोड़ रुपए का है, जबकि 72 नम्बर का दूसरा टेंडर 118.42 करोड़ रुपए का है। जांच में माना कि दोनों निविदा प्रक्रिया में उपकरण समान हैं और निविदा भी आस-पास ही की गई। इसके बावजूद दूसरी निविदा की कार्यादेश राशि 10 प्रतिशत अधिक है।
ट्रांसफार्मर रीडिंग: 195.46 करोड़ रुपए लागत का डिस्ट्रीब्यूशन ट्रांसफार्मर रीडिंग का कार्यादेश की प्रक्रिया को कठघरे में खड़ा किया गया है। प्रशासन का तर्क है अनुबंधित फर्म को काम सौंपने से पहले नेगोशिएशन किया गया, लेकिन और भी ज्यादा राशि कम कराई जा सकती थी।





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