मुकेश शर्मा/जयपुर. शहर में आए दिन एम्बुलेंस के जाम में फंसने और गंभीर मरीज की सांसों पर संकट आने की घटनाएं बढऩे के बाद डीसीपी टै्रफिक राहुल प्रकाश जरूरी होते ही ग्रीन कोरिडॉर बनाने में जुट गए हैं। जल्द यातायात नियंत्रण कक्ष को मोबाइल ऐप से जोड़ दिया जाएगा। ऐप के जरिए एम्बुलेंस को अस्पताल पहुंचने के लिए जाम रहित रास्तों से होकर पहुंचाया जाएगा। अत्यधिक गंभीर मरीज के लिए ग्रीन कॉरिडोर भी बनाया जाएगा। ऐप पर उपकरणों सहित साढ़े तीन लाख रुपए का बजट मांगा गया है। डीसीपी टै्रफिक राहुल प्रकाश का कहना है कि इस मोबाइल ऐप के जरिए तीन कैटेगिरी के मरीजों को अस्पताल पहुंचाने की व्यवस्था होगी। हमारी इसे अच्छे से संचालित करने की कोशिश रहेगी।
ऐसे मिलेगी ऐप से राहत
1. रजिस्ट्रेशन: प्रणाली का लाभ लेने के लिए एम्बुलेंस चालक और अस्पताल प्रशासन को ऐप पर एक बार रजिस्ट्रेशन करना अनिवार्य होगा।
2. ऑनलाइन मूवमेंट: कन्ट्रोल रूम ऑपरेटर को शहर के मैप पर सभी रजिस्टर्ड एम्बुलसों के मूवमेंट की जानकारी ऑनलाइन प्राप्त होगी।
3. अलर्ट बटन: एंबुलेंस चालक को कहीं जाम मिला तो वे अलर्ट बटन दबाएंगे। कन्ट्रोल रूम ऑपरेटर द्वारा वायरलैस पर एम्बुलेंस के मार्ग और आस-पास तैनात पुलिसकर्मियों को संदेश भेजकर एम्बुलेंस का रूट क्लियर करवाया जाएगा।
जयपुर में हैं 200 अस्पताल
ट्रैफिक पुलिस के मुताबिक जयपुर में सवाई मानसिंह, कांवटिया, जयपुरिया सहित सरकारी और निजी स्तर पर करीब 200 अस्पताल हैं। इन अस्पतालों में बाहर और शहर के विभिन्न इलाकों से एम्बुलेंस मरीजों को पहुंचाती हैं। ऐप पर एम्बुलेंस चालक को जिस अस्पताल में मरीज पहुंचाना है, उसकी जानकारी भरनी होगी और मरीज की हालत भी बताना होगी।
तीन तरह के मरीज
1. एप पर अत्यधिक गंभीर मरीज का अलर्ट बटन दबाने पर एम्बुलेंस के लिए खाली मार्ग बताने के साथ ट्रैफिक भी रुकवाया जा सकेगा।
2. गंभीर मरीज के लिए अलर्ट पर एम्बुलेंस के एक चौराहा-तिराहा को पार करने पर संदेश आगे वाले प्वाइंट पर तैनात पुलिसकर्मी के पास संदेश पहुंच जाएगा, जो एम्बुलेंस के लिए रास्ता क्लियर करवाएगा।
3. साधारण मरीज के लिए अलर्ट बटन पर कन्ट्रोल रूम पर तैनात पुलिसकर्मी एम्बुलेंस चालक को खाली मार्ग बताएगा।





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