चित्तौडग़ढ़. लोकसभा चुनाव को लेकर चित्तौडग़ढ़ संसदीय क्षेत्र में २९ अप्रेल को मतदान होने वाला है। कांग्रेस व भाजपा सहित विभिन्न राजनीतिक दलों ने प्रत्याशी तय कर दिए है। प्रत्याशी मतदाताओं को लुभाने के लिए वादों की किताबे तैयार करने में लगे है लेकिन हकीकत के धरातल पर मतदाता जिन समस्याओं से जूझ रहे है या विकास के जिन मुद्दों पर काम चाहते है वे अधिकतर प्रत्याशियों के एजेंडे से ही गायब है। चित्तौडग़ढ़, प्रतापगढ़ व उदयपुर जिले के आठ विधानसभा क्षेत्रों में फैलों चित्तौडग़ढ़ संसदीय क्षेत्र में पर्यटन बड़ा मुद्दा है लेकिन इस पर फौरी बाते ही अधिक हो रही है। संसदीय क्षेत्र में कई बड़े औद्योगिक उपक्रम लगे हुए है लेकिन उनमें स्थानीय युवाओं को योग्यता अनुरूप रोजगार नहीं मिलना भी बड़ा मुद्दा बन रहा है। स्वच्छता व विकास के पैमाने पर भी चित्तौडग़ढ़ निरन्तर पिछड़ रहा है लेकिन इन मुद्दों पर चुनाव प्रचार में गंभीरता नहीं दिख रही है। पत्रिका ने समाज के विभिन्न वर्गो की से चर्चा कर ये जाना कि उनकी नजर में संसदीय क्षेत्र के सबसे बड़े क्या मुद्दें है जो जनएजेंडा बनना चाहिए। महिला सुरक्षा एवं समग्र विकास भी बड़ा मुद्दा बनकर उभरे।
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पर्यटन सर्किट बने पर्यटक रोकने के लिए
भक्ति व शक्ति की धरा चित्तौड़ दुर्ग यूनेस्को की विश्व विरासत में शुमार होकर दुनिया में राजस्थान का गौरव बढ़ा रहा है। यहां गत वर्ष करीब दो लाख देशी व १५ हजाार से अधिक विदेशी पर्यटक आए। चित्तौडग़ढ़ में पर्यटक रात्रि में ठहरे एवं पर्यटन विस्तार हो इसके लिए चित्तौड़ दुर्ग को केन्द्र बना पर्यटन सर्किट स्थापित किया जाए। इसमें सांवलियाजी, मातृकुण्डिया, मेनाल, बस्सी अभयारण्य आदि भी शामिल हो। चित्तौड़ दुर्ग पर गाइड सुविधा बढ़ाने के साथ स्वयंसेवक भी तैनात किए जाए जो पर्यटकों को सही इतिहास से अवगत करा सके।
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उद्योगों में मिले स्थानीय युवाओं को रोजगार
चित्तौड़ जिले में छह सीमेन्ट फैक्ट्रियों के साथ ये देश की नजर में सीमेन्ट हब बन चुका है। चित्तौडग़ढ़ मार्बल उद्योग की दृष्टि से राज्य का प्रमुख औद्योगिक क्षेत्र बन गया है। सीमेन्ट व मार्बल उद्योग से सरकार को करोड़ो रुपए की राजस्व आय हो रही है। चित्तौडग़ढ़ संसदीय क्षेत्र में संचालित उद्योगों में स्थानीय युवाओं को रोजगार में प्राथमिकता भी बड़ा मुद्दा बन गया है। ये मांग भी उठ रही है कि नए खुलने वाले उद्योगों में पहले से तय हो कि कितने स्थानीय लोगों को किस तरह का रोजगार मिलेगा। चित्तौड़ क्षेत्र के युवाओं को रोजगार के लिए नए उद्योगों की स्थापना की दरकार भी है।
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पिछड़ रहे स्वच्छता की दौड़ में
ऑटो टीपर में स्वच्छ भारत का इरादा कर लिया हमने गीत बजाने से ही चित्तौडग़ढ़ स्वच्छ नहीं होने वाला ये तथ्य स्वच्छ सर्वेक्षण-२०१९ के परिणाम ने साबित कर दिया है। चित्तौडग़ढ़ सर्वे में शामिल देश के ४२५ शहरों में ३२७वें स्थान पर रहा है। राज्य के २८ प्रमुख शहरों में चित्तौडग़ढ़ की रैकिंग २२वें स्थान पर रही है। स्वच्छ सर्वेक्षण-२०१९ में चित्तौडग़ढ़ की स्थिति पिछले दो सर्वेक्षण के मुकाबले अधिक खराब हुई है। स्वच्छ सर्वेक्षण २०१८ में चित्तौडग़ढ़ देश में ३२० वें एवं वर्ष २०१७ में ३०१वें स्थान पर रहा था। गत वर्ष के सर्वे में चित्तौड़ राज्य में २३वें स्थान पर रहा था।
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रेले तो बढ़ी पर विकास की दरकार
अजमेर व रतलाम के मध्य सबसे बड़ा रेलवे स्टेशन बन चुके चित्तौैडग़ढ़ स्टेशन पर यात्री सुविधाओं का विस्तार भी लोगों की नजर में बड़ा मुद्दा है। स्टेशन पर निरन्तर बढ़ते यात्री भार के कारण पूर्वी प्रवेशद्धार खोलने की मांग भी उठी है। देश के कई प्रमुख शहरों के लिए अब भी सीधी रेल सेवा की कमी है।
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वीर भूमि पर हो सैन्य अकादमी
चित्तौडग़ढ़ में करीब छह दशक से सैनिक स्कूल संचालित है। यहां से शिक्षा प्राप्त दलबीरसिंह सुहाग सेनाध्यक्ष तो कई विद्यार्थी सेना में उच्च पदों पर पहुंच चुके है। अब भी यहां स्थानीय विद्यार्थी बहुत कम होने से ये मांग भी उठ रही है कि कुछ स्थान जिले के लिए आरक्षित हो। सैनिक स्कूल के बाद चित्तौड़ में सैन्य अकादमी स्थापित की करने की मांग भी उठी है ताकि यहां से अधिक सैन्य अधिकारी मिल सके।
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सुपर स्पेशलिस्ट चिकित्सक व ट्रोमा अस्पताल की जरूरत
करीब छह वर्ष पहले घोषणा के बावजूद चित्तौडग़ढ़ में मेडिकल कॉलेज नहीं खुल पाया। ऐसे में यहां जिला चिकित्सालय में सुपर स्पेशलिस्ट चिकित्सक लगाने की मांग है ताकि लोगों को गंभीर स्थिति में उपचार के लिए उदयपुर, अजमेर, जयपुर जैसे शहरों में नहीं जाना पड़े। संसदीय क्षेत्र का बड़ा हिस्सा राजमार्गो से जुड़ा होने के कारण सड़क दुर्घटनाओ का ग्राफ भी बढ़ रहा। ऐसे में पृथक ट्रोमा हॉस्पिटल की मांग भी उठ रही है।
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खेल प्रतिभाओं के लिए स्पोट्र्स अकादमी बने
जिले में प्रतिभावान खिलाडिय़ों की कमी नहीं है लेकिन उन्हें अपेक्षित मार्गदर्शन नहीं मिल पाता है। जिले की खेल प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने के लिए चित्तौडग़ढ़ के इंदिरा गांधी स्टेडियम में स्पोर्ट्स कॉम्पलेक्स स्थापित किया जाना चाहिए। इस स्पोर्ट्स कॉम्पलेक्स में खिलाडिय़ों के प्रशिक्षण के लिए आधुनिक सुविधाएं व प्रशिक्षक उपलब्ध हो।
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सीतामाता अभयारणय को बनाए पर्यटन का केन्द्र
विकास के साथ प्रकृति के वरदान के रूप में विध्यांचल व अरावली पवर्तमाला की गोद में करीब ४२३ वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैला सीतामाता अभयारण्य भी चित्तौडग़ढ़ संसदीय क्षेत्र में है। एक नवम्बर १९७९ को स्थापित इस अभयारण्य को राज्य का संरक्षित वन क्षेत्र घोषित करने के साथ बड़ा पर्यटन केन्द्र बना सकते है। इस अभयारण्य में १०८ से अधिक तरह के हर्बल औषधियां तैयार करने में सहायक पौधों के साथ ऊंचे-ऊंचे बबूल, पीपल, बरगद,नीम आदि के बड़ी संख्या में वृक्ष है।





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