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दिल्ली तक पहुंची बात, देवीसिंह भाटी का इस्तीफा मंजूर

जयपुर. केन्द्रीय मंत्री अर्जुनराम मेघवाल को बीकानेर लोकसभा क्षेत्र से प्रत्याशी बनाने के विरोध में इस्तीफा देने वाले दिग्गज नेता देवीसिंह भाटी का भाजपा ने इस्तीफा स्वीकार कर लिया है। उन्होंने 15 मार्च को त्यागपत्र दिया था, जो भाजपा प्रदेशाध्यक्ष मदनलाल सैनी ने शुक्रवार को स्वीकार कर लिया।भाटी का भाजपा से दूसरी बार नाता टूटा है। इससे पहले 2003 में भाजपा से अलग होकर सामाजिक न्याय मंच बनाया, उसके बैनर पर चुनाव लड़े और जीते थे। भाटी ने अर्जुनराम पर कांग्रेस से मिलीभगत रखने, विधानसभा चुनाव में पार्टी प्रत्याशी के खिलाफ काम करने का आरोप लगाते हुए इस्तीफा दिया था।

 

 

इसके बाद भी पार्टी ने अर्जुनराम को ही बीकानेर सीट से प्रत्याशी बनाया है। दोनों खेमों में तल्खी बढ़ रही थी, भाटी समर्थक खुलकर अर्जुनराम का विरोध कर रहे थे। सूत्रों के मुताबिक पिछले दिनों जयपुर में भाजपा कोर कमेटी की बैठक में भी यह मसला उठा। अर्जुनराम ने अपने खिलाफ हो रहे प्रचार की प्रदेश इकाई को शिकायत की थी। आखिर मामला दिल्ली तक पहुंचा और शुक्रवार को इस्तीफा स्वीकार कर भाटी की प्राथमिक सदस्यता रद्द कर दी गई।

 

 

 

सात बार विधायक, 2013 में टूटा जीत का सिलसिला
भाटी कोलायत सीट से लगातार ७ बार विधायक चुने गए। मंत्री भी रहे। वर्ष 2013 में भाजपा के बैनर पर चुनाव लड़ा लेकिन हार गए। पिछले विस चुनाव में भाजपा ने उनकी पुत्रवधू को टिकट दिया लेकिन जीत नहीं पाईं। इससे पहले 2003 के विस चुनाव में भाटी भाजपा से अलग होकर सामाजिक न्याय मंच के बैनर तले चुनाव लड़े और जीते थे। इसके बाद 2008 का चुनाव फिर भाजपा से लड़ा।

 

 

 

भाजपा को खड़ा करने वालों की बेकद्री : भाटी
इस्तीफा स्वीकार होने के बाद देवीसिंह भाटी ने कहा कि भाजपा को बीकानेर जिले में खड़ा करने वालों की पार्टी ने बेकद्री की है। मेरा इस्तीफा स्वीकार कर लिया, मुझे कोई फर्क नहीं पड़ेगा, लेकिन यहां के जनप्रतिनिधियों से तो पूछ लेते कि जिस व्यक्ति पर मैं आरोप लगा रहा हूं वह सही है या गलत। टिकट बदलने की मांग के लिए भाजपा कार्यकर्ताओं की खिलाफत जारी है। उनका विरोध आगे भी जारी रहेगा। पहले भी मैं आमजन के मुद्दों को लेकर पार्टी से लड़ता आया हूं।



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