झुंझुनूं. शिक्षा का अधिकार अधिनियम (आरटीइ)के तहत प्रदेश के स्कूलों में प्रवेश के लिए निकाली गई लॉटरी के बाद कई प्रकार की गड़बडिय़ां सामने आ रही हैं। एक ही स्कूल में एक ही बच्चे का प्रवेश के लिए दो से तीन बार तक नाम आ रहे हैं, जिसके चलते शिक्षण संस्थाओं के संचालक भी असमंजस में हैं। यह गड़बड़ी लॉटरी निकालने से पहले बिना जांच-पड़ताल के कारण हुई है या फिर अभिभावकों की ओर से बच्चों को प्रवेश दिलाने के लिए भरे गए ऑनलाइन फार्मों से। आरटीइ के पोर्टल पर कई स्कूलों में इस तरह के कई बार नाम आ रहे हैं, जिनमें कइयों में तो पढ़ाई माध्यम एक है, जबकि कइयों में बच्चे का नाम, माता-पिता, पता एक है और माध्यम बदल रखा है। निजी शिक्षण संस्थाओं में निशुल्क प्रवेश के लिए भरे गए ऑनलाइन आवेदनों में एक बच्चे के लिए 15 स्कूलों में प्रवेश की च्वाइस दी गई। इसके चलते बच्चों के अभिभावकों ने प्रवेशित क्लास के लिए ऑनलाइन आवेदन में 15 स्कूलों के नाम दर्ज कर दिए हैं, हालांकि इन 15 स्कूलों में एक में ही बच्चों को प्रवेश दिया जाएगा।
सालाना आय एक लाख
इंट्री क्लास में बच्चों के निशुल्क प्रवेश के लिए इस बार सरकार ने बच्चे की अभिभावक की आय सामान्य और अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए सालाना एक लाख रुपए रखी है। जबकि पिछले सत्र में ढाई लाख रुपए सालाना आय के मानदंड रखे गए। जबकि एससी-एसटी व बीपीएल के बच्चों के लिए सालाना आय का कोई मानदंड नहीं रखे गए हैं।
इनका कहना है....
गलती लॉटरी निकालने में हुई है या फिर अभिभावकों की। इसका पता करवाते हैं। हो सकता है अभिभावकों ने एक ही बच्चे के तीन-तीन फार्म भरकर बच्चे से जुड़े डेटा बदल दिए हों।
मनीष चाहर, एडीइओ प्रारंभिक शिक्षा कार्यालय झुंझुनूं





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