सूरतगढ़ तापीय विद्युत परियोजना की 660 मेगावाट की सातवीं सुपर क्रिटिकल इकाई के डीएम (डी मिनरलाइज ) वाटर टैंक में आये डेंट से निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर प्रश्नचिन्ह लग रहा है।
मिली जानकारी के अनुसार रविवार दोपहर को आये तेज तूफान के बाद से नव निर्मित 660 मेगावाट की सातवी सुपर क्रिटिकल इकाई के बॉयलर में उपयोग होने वाले डीएम वॉटर की स्टोरेज के लिए बनाए गए करीब 11 हजार मीट्रिक टन क्षमता के टैंक में डेंट नजर आ रहे है। जिसके कारण श्रमिक संगठन निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर प्रश्नचिन्ह लगा रहे है।
इस संबन्ध में सुपर क्रिटिकल इकाइयों के मुख्य अभियंता बीपी नागर ने बताया कि नव निर्मित 660 मेगावाट की सातवीं सुपर क्रिटिकल इकाई फिलहाल परीक्षण की प्रक्रिया में है। इकाई के परीक्षण के दौरान इस तरह की खामियां भी नजर आती है। जिन्हें ठीक करते हुए आगे बढ़ा जाता है। उन्होंने बताया कि मुख्य निर्माण कम्पनी भारत हैवी इलेक्ट्रिकल लिमिटेड की ओर से इकाई को उत्पादन निगम को हैंड ओवर करने से पूर्व सभी तरह की निर्माण जांच की जाएगी और करीब एक माह तक लगातार पूरी क्षमता से उत्पादन किया जाएगा। इस दौरान यदि किसी प्रकार की तकनीकी समस्या आती है तो भेल की ओर से उसे ठीक किया जाएगा।
मुख्य अभियंता ने बताया कि तकनीकी कारणों से नव निर्मित डीएम वॉटर टैंक कुछ जगहों से पिचक गया है। उसे ठीक करने के लिए भेल को कहा गया है।
सूरतगढ़ विद्युत उत्पादन मजदूर यूनियन इंटक के अध्यक्ष श्याम सुंदर शर्मा ने निर्माण कम्पनी और संबंधित अधिकारियों पर कई आरोप लगाए हैं। उन्होंने निर्माण कम्पनी और संबंधित अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की है।





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