रामसर. आग से ढाणी जलने के बाद आसमान तले आए दिव्यांग के परिवार की सहायता के लिए अब आमजन आगे आ रहे हैं। सरकारी स्तपर पर सहायता नहीं मिलने पर दिव्यांग जालाराम अपने दो मासूम बेटों के साथ शुक्रवार को ट्राइसाइकिल पर जिला मुख्यालय पहुंचा।
इस दौरान बच्चों ने बारी-बारी से साइकिल को धक्के लगाए। यहां उन्होंने जिला कलक्टर से सहायता की गुहार लगाई तो उन्होंने इसका आश्वासन दिया। घटना को लेकर शनिवार को राजस्थान पत्रिका में समाचार प्रकाशित होने के बाद अब लोग आगे आ रहे हैं।
को-ऑपरेटिव बैंक प्रबंध निदेशक हरिराम पूनिया, मांगी लाल संखलेचा, रमेश जैन, पूर्व स्थानीय प्रबंधक कमलाराम, गोकूलसिंह, हरीराम, शंकरसिंह, राधेश्याम, लाखाराम, प्रह्लाद राम ने उन्हें 21 हजार रुपए की सहायता दी।
ये था मामला पूरा पढ़े...
मासूम बेटों ने बारी-बारी मारे 60 किमी तक ट्राइसाइकिल के धक्के, दिव्यांग पिता पहुंचा कलक्टर के दर
- पति- पत्नी दिव्यांग, कच्ची ढाणी आग से स्वाह, अब पेट की आग ने किया इतना मजबूर
- घर आग से जल गया, मूलभूत सुविधाओं से महरूम
बाड़मेर. दो मासूम बच्चे। उम्र 4 और 8 साल। पिता दिव्यांग। मां भी दिव्यांग। आर्थिक तंगी से पहले से तंगहाल थे और मुसीबत पर मुसीबत कच्चे झोंपे भी कुछ समय पहले जलकर खाक हो गए। ढाणी की आग के बाद अब इस दिव्यांग को पेट की आग ने भी घेर लिया।
मामूली दिव्यांग पेंशन के सहारे परिवार के चार सदस्यों का गुजारा संभव नहीं रहा तो सरकारी सहायता को पटवारी,ग्रामसेवक, उपखण्ड स्तर पर अर्जी लगाई। सहायता कहीं नहीं मिली तो मजबूर पिता अपने दोनों मासूमों के साथ जिला कलक्टर तक अपनी पीड़ा सुनाने निकल पड़ा।
ट्राइसाइकिल पर दो मासूम बेटों के साथ रवाना हुआ। खुद ट्राइसाइकिल चलाता रहा और जहां पर थकने लगा ये मासूम साइकिल से उतरे और उसको धक्का देकर आगे करते रहे। बारी-बारी धक्के मारने और बाड़मेर तक पहुंचने का यह सफर इन तीनों पिता-पुत्र ने 16 घंटे में कैसे तय किया इसके जवाब में कहते हैं पेट में आग लगी हो तो सबकुछ करना पड़ता है।
रामसर गांव का दिव्यांग जालाराम करीब 16 घंटे बाद बाड़मेर पहुंचा। रामसर बाड़मेर से साठ किलोमीटर दूर है। रामसर आगोर निवासी 55 वर्षीय दिव्यांग जालाराम पुत्र उगराराम ने कलक्टर को बताया कि उसकी स्थिति दयनीय है।
वह दिव्यांग हूै। पत्नी भी दिव्यांग है। परिवार की आर्थिक स्थिति बहुत दयनीय है। मवाद के कारण पांव पूरा खराब हो गया है, चिकित्सकों के अनुसार पंाव को कटवाना है, उसने नि:शुल्क उपचार करवाने की मांग की।
न आवास, न विद्युत कनेक्शन मिला
उसने बताया कि कच्ची ढाणी कुछ दिन पहले आग लगने से जल गई। गरीब होने के बावजूद मुझे न तो आवास मिला है और न ही विद्युत कनेक्शन। दोनों मासूम बेटों की शिक्षा भी अधरझूल है। परिवार का पालन-पोषण भी नहीं कर पा रहा हूं।





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