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आसरलाई गांव के वाशिन्दों को खारा पानी पीना बनी मजबूरी

शफी मोहम्मद निमाज। मिनखा रे हाथे डांडा. धाव ई तीरा मरे है, ऐड़ा पाणी रो कांई करां। लूण जेडो है ओ पाणी। हाथा-पगा रे हाथे रोइ-रोइ दुखे हैं। रात भर नींद नी आवे। पेयजल की समस्या को लेकर यह पीड़ा आसरलाई ग्राम पंचायत मुख्यालय पर महिलाओं के साथ ग्रामीणों ने शुक्रवार को पत्रिका संवाददाता के सामने बयां की। महिलाओं के साथ उपस्थित ग्रामीणों का कहना था कि पिछले छह महीनों से ग्रामवासियों को पीने के लिए खारा पानी ही नसीब हो रहा है। मीठे पानी के लिए ग्रामवासियों के साथ पशुधन को भी ठोकरे खानी पड़ी रही हैं। आसरलाई गांव समेत आस-पास की ढाणीयों के ग्रामीण पेयजल संकट की समस्या से जूझ रहे हैं। पशुओं व ग्रामीणों के लिए पेयजल का संकट हो गया है। गांव में पशु खेळियां खाली पड़ी हैं। अधिकारियों तक को समस्या बताई, कोई सुनवाई करने वाला नहीं हैं।
जम जाती हैं सफेद पपड़ी
गांव के पूनाराम, हनुमान लाल, मीठालाल समेत ग्रामीणों का कहना है कि अब पूरे गांव में खारा पानी है। खारे पानी के कारण मटकों, बर्तनों आदि में सफेद पपड़ी जम जाती है। इससे मटके व बर्तन भी जल्दी खराब हो जाते हैं। कई बार ग्रामीणों व पशुओं के लिए पेयजल की गुहार की, लेकिन कोई सुनने वाला ही नही हैं।
दुखता है शरीर
आसरलाई गांव की भंवरीदेवी, गोदावरी, सत्यनाराण, शिवलाल ने अपनी आंचलिक भाषा में बताया कि गांव में नमक जैसे पानी से बच्चों से लेकर बुजुर्गो तक के घुटनों के साथ शरीर के जोड़ दर्द करने लगे हैं। जानवर भी खारा पानी नहीं पी रहे हैं। एक हजार रुपए तक देने के बावजूद समय पर पानी का टैंकर भी नहीं आता है।
क्या हाल होंगे भीषण गर्मी में
ग्रामीण क्षेत्र में गर्मी की शुरुआत होने के साथ ही पेयजल संकट शुरू हो गया है। गर्मी की शुरुआत में ही ये स्थिति है तो भीषण गर्मी में गांवो में पेयजल के हालातों का अंदाजा लगाया जा सकता है। ग्रामीणों को टैंकरों के माध्यम से मुंह मांगे दाम देकर पानी खरीदना मजबूरी बन गई है।
ऐसे बिगड़े आसरलाई के हालात
आसरलाई के वाशिन्दों के लिए करीबन चार वर्ष पूर्व गांव से चार किलोमीटर दूर दो ट्यूबवेल खुदवाए गए थे। ट्यूबवेल से पाइप के जरिए गांव में बनी टंकी में पानी आता, वहां से ग्रामवासियों के लिए पेयजल की आपूर्ती होती थी। दो-तीन वर्ष तो हालात ठीक रहे। अब पिछले छह-सात महीनों से दोनों ट्यूबवेल ने जवाब दे दिया है। पानी खारा हो गया है। ग्रामीणों को खारा पानी ही नसीब हो रहा है। ऐसे में ग्रामीण पानी मोल खरीद रहे है।

 



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