दिलीप दवे
बाड़मेर. बाड़मेर में बालिकाओं का जिक्र आते ही कुछ साल पहले जेहन में एक ही तस्वीर आती थी कि कहीं पानी मटका सिर पर लिए तो कहीं चूल्हा-चौका संभालने का जिम्मा। अब यह तस्वीर बदल चुकी है। आज गांव या ढाणी में डगर पर कदम से कदम मिला बालकों के साथ स्कूली जाती बालिकाएं, यह सूरत दिखती है। स्कूलों में भी छात्रों से ज्यादा या लगभग समान संख्या में बालिकाएं पढ़ रही हैं। यह तस्वीर बाड़मेर की नई सोच और नारीशक्ति के उत्थान की कहानी बयां कर रही है। जिले के एक-दो नहीं करीब आधा दर्जन ब्लॉक एेसे हैं, आओ स्कूल चलें की तर्ज पर छात्राएं, छात्रों से ज्यादा है।
विकास की राह पर चलने वाले सीमांत जिले की सोच भी इक्कीसवीं सदी के साथ कदम से कदम मिला कर चल रही है। गांव-ढाणी में बैठे लोगों की यह सोच अब बदल गई है कि बच्चियां पढ़ कर क्या करेंगी। यहीं कारण है कि जिले के सरकारी विद्यालयों में बालिकाओं की तादाद दिनोंदिन बढ़ रही है। पग-पग पर स्कूल और प्रचार-प्रसार के चलते अब शिक्षा का स्तर बढ़ा है। वहीं बालिका शिक्षा में भी जिले की सुखद स्थिति है। पहली से पांचवी तक की कक्षाओं में जिले के सत्रह ब्लॉक में से बालोतरा, बायतु, गुड़ामालानी, कल्याणपुर, समदड़ी, सिणधरी ब्लॉक में बालिकाओं की तादाद ज्यादा है। छठी से आठवीं में भी कमोबेश यही स्थिति है। इन कक्षाओं में बालोतरा, बायतु, गुड़ामालानी, कल्याणपुर, समदड़ी और सिणधरी में छात्राएं अधिक हैं। नवीं व दसवीं कक्षाओं में बायतु ब्लॉक ही एक मात्र एेसा ब्लॉक है, जहां बालिकाएं बालकों से ज्यादा हैं। ग्यारहवीं व बारहवीं में धोरीमन्ना ब्लॉक में बालिकाओं की तादाद बालकों से अधिक है।
तीन ब्लॉक में बच्चियां अधिक- जिले में पहली से बारहवीं तक की कक्षाओं में तीन ब्लॉक एेसे हैं, जहां बालिकाओं की तादाद बालकों से ज्यादा हैं। बालोतरा, कल्याणपुर और समदड़ी में यह सुखद स्थिति है।
इसलिए भी सुखद- जिले में प्राथमिक से उच्च माध्यमिक स्तर तक के 4657 विद्यालय हैं। इनमें से सिर्फ बालिकाओं की शिक्षा को लेकर बालिका विद्यालयों की तादाद 113 ही हैं। प्राथमिक स्तर पर तो एक भी बालिका विद्यालय नहीं है जबकि उच्च प्राथमिक बालिका विद्यालयों की तादाद 85 हैं। माध्यमिक एवं उच्च माध्यमिक स्तर पर बालिका स्कूल 28 हैं। एेसे में आठवीं के बाद परिजन घर से अधिक दूरी, को-एजुकेशन की झिझक के चलते बालिकाओं को विद्यालय भेजने में परहेज करते हैं। बावजूद इसके बालिकाओं की बढ़ती संख्या अच्छा संकेत है।
सोच में बदलाव- धीरे-धीरे जिले की सोच में बदलाव आ रहा है। यहीं कारण है कि बालिका शिक्षा को लेकर भी लोगों के विचार बदल रहे हैं। बालोतरा, समदड़ी और कल्याणपुर ब्लॉक में बालिकाओं की तादाद बालकों से अधिक है। - उम्मेदसिंह अराबा, पूर्व सरपंच अराबा
बेहतर स्थिति- हालांकि अभी भी बालिकाओं की तादाद बालकों से कम है, लेकिन लिंगानुपात को देखते हुए यह स्थिति भी बेहतर है। जिले में बालिका शिक्षा को लेकर बदलाव सुखद संकते हैं।- किरण मंगल, अधिवक्ता
बदलाव की स्थिति- जिले में शिक्षा को लेकर सोच बदली है। सरकारी प्रयास और प्रचार-प्रसार के चलते शिक्षा का स्तर बढ़ रहा है। हमारा प्रयास रहेगा कि जिले में शिक्षा से वंचित प्रत्येक बालिका-बालक को शिक्षा से जोड़ इस अनुपात को और बेहतर बनाएं।- नरसिंगप्रसाद जांगिड़, सहायक निदेशक, समग्र शिक्षा अभियान बाड़मेर





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