चूरू/सादुलपुर।
छत्तीसगढ़ के भाटापारा निवासी नेतराम निषाद के परिवार की आंखे बेटी मनीषा की शादी के बाद विदाई को लेकर नम थी। ऐन इसी मौके पर गांव के सरपंच उन्हें एक साल पहले बिछड़े बेटे डोगेन्द्र के मिलने की सूचना देते हैं। इस सूचना पर परिजनों की नम आंखों में खुशी के आंसू छलक उठते है। यह संभव हो पाया सादुलपुर के मनीष शर्मा की बदौलत।
खाना खिलाया, घर ले गए
मनीष 19 अपे्रल को माहेश्वरी भवन में एक शादी समारोह में शामिल होकर लौट रहे थे। जोगी आश्रम स्थित फोरपोल के पास एक युवक कचरे में से कुछ निकालकर खाता नजर आया। मनीष उसे लेकर माहेश्वरी भवन में आए और उसे खाना खिलाया। बाद में उसे अपने घर ले गए। पूछने पर उसने अपना नाम डोगेन्द्र निषाद निवासी भाटापारा छत्तीसगढ़ बताया। मनीष ने वहां की पुलिस से पता किया। पुलिस ने उसके गांव के सरपंच नंदकुमार मांडलेरा को उस युवक के बारे में बताया। सरपंच युवक के घर गया तो वहां उस युवक की बहन मनीषा की शादी हो रही थी। सरपंच ने बिछड़े पुत्र के बारे में बताया कि तो उसकी मां सीमा, मामा होरीलाल व चाचा का लडक़ा पारस सादुलपुर पहुंचे। बेटी मनीषा की विदाई पिता और चाचा ने की।
एक साल पहले घर से निकला था
नेतराम निषाद का पुत्र डोगेन्द्र करीब एक साल पहले किसी बात को लेकर घर से बिछुड़ गया था। परिजनों ने उसे खूब तलाशा, लेकिन वह नहीं मिला। उधर, डोगेन्द्र घूमते-धूमते सादुलपुर पहुंच गया। यहां खाने को नहीं मिला तो कचरे में से चुन-चुनकर खाने लगा। डोगेन्द्र की मां सीमा ने बताया कि उसका पुत्र होली के दो दिन पूर्व अचानक लापता हो गया। शादी के बाद बेटी की विदाई में परिजनों की आंखें नम थी, वहीं इकलौते गुमशुदा बेटे के मिलने की खुशी भी परिवार के सदस्यों के चेहरों पर झलक रही थी।
फोटो - प्रतिकात्मक





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