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वैभव गहलोत के साथ नामांकन भरने के दौरान अचानक इस महिला विधायक की मौजूदगी ने सभी को चौंकाया, सियासी गलियारों में बढ़ी चर्चा

जोधपुर।

लोकसभा चुनाव ( Lok Sabha Election 2019 ) में हॉट सीट बने जोधपुर संसदीय क्षेत्र ( Jodhpur lok sabha constituency ) में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ( Cm Ashok Gehlot ) के पुत्र वैभव गहलोत ( VAIBHAV GEHLOT ) ने मंगलवार को नामांकन पत्र भरा। इस दौरान उनके साथ ओसियां की विधायक दिव्या मदेरणा ( Divya Maderna ) की मौजूदगी ने सियासी पंडितों को चौंका दिया है।

 

मारवाड़ की जाट राजनीति के पर्याय रहे खांटी नेता स्व. परसराम मदेरणा की बेटी और भंवरी देवी अपहरण कांड में जेल में बंद पूर्व मंत्री महिपाल मदेरणा ( Mahipal Maderna ) की बेटी दिव्या मदेरणा ने सियासी पंडितों को हैरत में डाल दिया। वे जोधपुर संसदीय क्षेत्र से चुनावी राजनीति में प्रवेश कर रहे सीएम गहलोत के बेटे वैभव का नामांकन भरवाने के लिए साथ पहुंची। यह सम्भवतः पहला मौका था जब गहलोत के परिवार के किसी सदस्य के साथ मदरेणा परिवार का कोई सदस्य नजर आया है। वैभव सुबह 11 बजकर 28 मिनट पर अपना नामजदगी पर्चा जिला निर्वाचन अधिकारी के समक्ष पेश किया।

 

दिव्या व राजस्थान में सहकारी अपेक्स बैंक की चेयरपर्सन रही उनकी माता लीला मदेरणा को गहलोत का धुर विरोधी माना जाता है। गहलोत पर इनके विवादित बयान भी चर्चाओं में रहे हैं...हाल के विधानसभा चुनाव में दिव्या ने ओसियां क्षेत्र में गहलोत की सभा तक करवाने की इच्छा जताने से भी परहेज किया था। ऐसे में दिव्या का गहलोत के पुत्र के नामांकन के वक्त मौजूद रहना नए राजनीतिक समीकरणों के संकेत दे रहा है। दिव्या के अलावा कांग्रेस के देहात जिलाध्यक्ष व बिलाड़ा से विधायक हीरालाल मेघवाल, लूणी से कांग्रेस के विधायक महेंद्र विश्नोई व जोधपुर शहर जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष सईद अंसारी भी मौजूद थे। खासियत की बात ये है कि दिव्या और मेघवाल के निर्वाचन क्षेत्र जोधपुर की बजाय पाली संसदीय क्षेत्र का हिस्सा हैं।

 

दिव्या ने वैभव के समर्थन में आयोजित चुनाव सभा में भाषण भी दिया। उन्होंने कहा कि वे तीसरी और वैभव दूसरी पीढ़ी के नेता हैं। मदेरणा साब गहलोत को राजनीति में लाए। गहलोत ने मुझे राजनीति में मौका दिया, वैभव युवा और दूसरी पीढ़ी के नेता हैं...हम सभी को मिलकर उनको विजयी बनाना चाहिए। दिव्या का गहलोत के साथ इस तरह की व्यवहार पहली बार दिखाई दिया। जबकि दोनों परिवारों की तल्खी जगजाहिर है।

 

दिव्या की मौजूदगी पर आश्चर्य का बड़ा कारण मदेरणा परिवार की गहलोत के प्रति तल्खी भी है...वैसे तो गहलोत जब 1986 में पहली बार प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष बनकर आए तब से दोनों खेमों में छत्तीस का आंकड़ा रहा है, लेकिन गहलोत जब पहली बार 1998 में मदेरणा को पीछे छोड़ मुख्यमंत्री बने...तब से ये तल्खी ज्यादा बढ़ी। उस वक्त परसराम मदेरणा को सीएम पद का स्वाभाविक उम्मीदवार माना जा रहा था। यहां तक कि कांग्रेस ने भी परोक्ष रूप से मदेरणा को भावी सीएम के रूप में पेश कर पहली बार 156 सीटों का बम्पर बहुमत हासिल किया था। लेकिन जब सीएम की बजाय मदेरणा को विधानसभा स्पीकर बना दिया गया, उसके बाद से राज्य की जाट राजनीति बदली हुई नजर आती है। कांग्रेस ने किसानों का प्रतिनिधित्व करने वाले इस तबके में अपना जनाधार काफी हद तक खोया है। इसका 2003 के विधानसभा चुनाव के बाद लगातार कांग्रेस की राजनीति पर नजर आ रहा है।

 

क्या जाट मतों को रिझाने के लिए कांग्रेस ने दिव्या को वैभव के साथ दिखाने का प्रयास किया है...ये सवाल जोधपुर संसदीय क्षेत्र ही नहीं प्रदेश की कांग्रेस राजनीति में भी मौजूं हो चला।

 

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