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वतन वापसी केे दौर में पीछे छूट गई तीन कुरजाएं,गर्मी के मौसम में बीमार पडऩे की आशंका

पोकरण/लाठी. प्रवासी पक्षी कुरजां का एक परिवार इन दिनों क्षेत्र के कोजेरी नाडी पर डेरा डाले हुए है। आशंका जताई जा रही है कि ये कुरजां बीमार पड़ जाने से समय पर उड़ान नहीं भर पाई है, तीन कुरजां पक्षी नाडी पर रह गई व अन्य साथी कुरजां का समूह स्वदेश के लिए उड़ान भर चुका है। ऐसे में यहां रह गई कुरजाओं के अब गर्मी के प्रतिकूल मौसम में और अधिक बीमार होने की आशंका बनी हुई है। गौरतलब है कि कजाकिस्तान, मंगोलिया, चीन, रूस में बहुतायत में पाए जाने वाले कुरजां पक्षी राजस्थान में सर्दी के मौसम की शुरुआत के साथ यहां आ जाती है। सितम्बर माह से फरवरी माह तक प्रवास के बाद गर्मी की शुरुआत होते ही ये पक्षी यहां से पुन: स्वदेश की ओर रवानगी कर देती है।
तीन कुरजां कर रही विचरण
क्षेत्र के डेलासर-चांधन के बीच कोजेरी नाडी स्थित है। जिसमें बारिश का पानी भरा हुआ है। यहां सितम्बर से फरवरी माह तक बड़ी संख्या में कुरजाओं ने अपना डेरा डाला था। फरवरी-मार्च माह के बीच कुरजाओं ने यहां से रवानगी कर दी। इस दौरान तीन कुरजां उड़ान नहीं भर पाए। आशंका व्यक्त की जा रही है कि बीमार होने के कारण वे उड़ नहीं पाए और यहीं रुक गए। वन्यजीव विशेषज्ञ राधेश्याम पेमाणी ने बताया कि गत कई दिनों से ये तीन कुरजाएं नाडी के आसपास विचरण कर रही है।
...और अब बीमार होने की आशंका
नई दिल्ली स्थित गुरु गोविंदसिंह इन्द्रप्रस्थ विश्वविद्यालय के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ.सुमित डूकिया व वन्यजीव विशेषज्ञ राधेश्याम पेमाणी ने बताया कि कुरजां के लिए ठण्डा मौसम अनुकूल है। इसी कारण सितम्बर से फरवरी माह के बीच राजस्थान में सर्दी के मौसम में कुरजाएं यहां प्रवास करती है और फरवरी व मार्च माह के बीच पुन: रवाना हो जाती हैै। उन्होंने बताया कि आशंका जताई जा रही है कि बीमार व कमजोर होने के कारण ये तीन कुरजाएं उड़ान नहीं भर पाई, जो अभी तक यहां नाडी पर डेरा डाले हुए है। उन्होंने बताया कि पश्चिमी राजस्थान में भीषण गर्मी का मौसम इनके लिए प्रतिकूल है। अप्रेल के बाद मई व जून माह की भीषण गर्मी इनके लिए सहन करना मुश्किल होगा। यदि जल्द ही ये पक्षी उड़ान नहीं भरते है, तो इनके और अधिक बीमार होने की आशंका है।



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