बीकानेर. चलती ट्रेनों पर पत्थरबाजी की बढ़ती घटनाओं को लेकर रेल प्रबंधन की नींद उड़ी हुई है। खासकर उच्च तकनीक से तैयार नई ट्रेनें पत्थरबाजों के निशाने पर आ रही है। इस तरह की घटनाओं से निजात पाने के लिए रेलवे प्रबंधन विकल्प खोज रहा है। इसके तहत पहले चरण में कोच की खिड़कियों और दरवाजों पर विशेष तरह के शीशे लगाए जाने की योजना है। इसमें नए बनने वाले कोचों में विनायल कोटेड शीट व रेसिन की कोटिंग का उपयोग किया जा सकता है। नई तकनीकी से निर्मित यह प्लास्टिक के समान सामग्री होगी। इसके बाद शीशों पर पत्थर लगने के बाद भी वे नहीं टूटेंगे। यह बहुत मजबूत और पार्दर्शी होंगे। अंदर बैठे यात्री बाहर का नजारा देख सकेंगे लेकिन बाहर से अंदर की गतिविधि नजर नहीं आएगी।
देश में हाल ही में शुरू हुई वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेन पर भी पत्थरबाजी हो चुकी है। इससे उसके शीशों में दरारे आ गई थी। देश की पहली उच्च तकनीकी से तैयार इस ट्रेन को जल्द ही विशेष तरह के शीशों से लैंस कोच मिलेंगे। इसी तरह महानगरों में चलने वाली लंबी दूरी की मुख्य ट्रेनों में पहले चरण में प्रायोगिक तौर पर नए कोच लगाए जाएंगे। पूर्व में रेलवे ने कई बार पत्थरबाजी की घटनाओं पर अंकुश के लिए प्रयोग किए लेकिन कारगर नहीं हुए। अब यात्रियों व रेल सुरक्षा को देखते हुए ट्रेन कोच का सुरक्षा मजबूत की जाएगी।





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