- कच्छ के रण में प्रजनन से पहले बांडी नदी में पहुंचे प्रवासी फ्लेमिंगो
- जलस्तर घटने से आसानी से सुलभ हो रहा है भोजन
-राजकमल व्यास
पाली। प्रवासी पक्षी फ्लेमिंगो, जिसे राजहंस भी कहा जाता है। पिछले कुछ दिनों से इन विदेशी मेहमानों को मारवाड़ की धरा कुछ ज्यादा ही रास आ रही है। इन दिनों इन विदेशी परिंदों ने पाली की बांडी नदी में डेरा डाल रखा है। वैसे तो नदी में पानी कम ही है, लेकिन, अच्छे भोजन की आस में राजहंस ने इसे ही उपयुक्त माना है। इनकी अठखेलियां अनायास ही लोगों को आकर्षित कर रही है।
दरअसल, फ्लेमिंगो प्रजाति के ये प्रवासी परिंदे मानसून से पहले प्रजनन करने के लिए कच्छ की ओर प्रस्थान कर जाते हैं। इन दिनों ये पाली की बांडी नदी के साथ ही आसपास के तालाबों में अठखेलियां कर रहे हैं। इनके यहां आने का कारण नदी के साथ ही तालाब में पानी होना है। वैसे तो गर्मी की दस्तक के साथ ही नदी व तालाबों में पानी कम हो चुका है। लेकिन, कम पानी होने से इन्हें भोजन आसानी से मुहैया हो जाते हैं। मूलत: ये परिंदे यूरोपियन देशों के साथ ही दक्षिण एशिया में प्रवास करते हैं।
एक टांग पर खड़े रहकर लेते हैं नींद
बांडी नदी में पहुंचे ये राजहंस पक्षी घंटों तक एक टांग पर ही खड़े रहते हैं। ये स्थानीय लोगों के लिए अचरज का विषय बना हुआ है। हालांकि, जानकारों की मानें तो ये परिंदे करीब पांच घंटे तक एक टांग पर खड़े रहते हैं। साथ ही इस मुद्रा में ये नींद भी ले लेते हैं।
जीवन संगिनी के साथ ही खाते हैं भोजन
राजहंस के जोड़े की एक खासियत ये भी है कि ये अपने जीवन साथी के साथ भोजन बांटकर खाते हैं। ये जीवन पर्यंत अपने साथी के साथ रहते हैं। एक-दूसरे के साथ भोजन शेयर करने के लिए जब ये अपने लम्बी गर्दन घुमाते हैं तो अलग ही नजारा बन पड़ता है।
आखिर में आते हैं ये प्रवासी मेहमान
लम्बी और खूबसूरत टांगों और गुलाबी रंग की आकर्षक चोंच वाले इन परिंदों को राजहंस के अलावा हंसावर के नाम से भी जाना जाता है। एकमात्र ये ही प्रवासी परिंदे हैं, जो सबसे बाद में यहां आते हैं। करीब चार से पांच फीट की ऊंचाई वाले ये परिंदे मारवाड़ के पक्षी प्रेमियों को भी खासा लुभा रहे हैं।





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