भीलवाड़ा।
अतिरिक्त सेशन न्यायाधीश (महिला उत्पीडऩ मामलात) हिमांकनी गौड ने महिला को आत्महत्या के लिए मजबूर करने के मामले में मृतका के पति और श्वसुर को दोषी मानते हुए सोमवार को सात साल की सजा सुनाई। वहीं 13-13 हजार रुपए जुर्माने के आदेश दिए। सजा पाने में वालों में माण्डलगढ़ निवासी दुर्गालाल उर्फ दुर्गेश माली और उसकी पिता घीसालाल शामिल है।
प्रकरण के अनुसार 20 अगस्त 2010 को गोविंदपुरा (बीगोद) निवासी लक्ष्मण माली ने माण्डलगढ़ थाने में मामला दर्ज कराया। परिवादी ने बताया कि उसकी पुत्री केसर की शादी दुर्गालाल के साथ सात-आठ साल पूर्व हुई थी। केसर कक्षा नौ तक नंदराय स्कूल में पढ़ती थी। उसका पति दुर्गालाल ससुराल आया और केसर को साथ ले जाने की जिद्द करने लगा। उसने कहा कि केसर को माण्डलगढ़ ही पढ़ाएगा। घर में कामकाज में दिक्कत आ रही है। केसर पढ़ाई के कारण जाना नहीं चाहती थी।
दुर्गालाल के पिता घीसालाल को भी बुलाया गया। लेकिन वह भी केसर को ससुराल ले जाने के लिए आमदा था। एेसे में केसर को जबदस्ती ससुराल ले गए। वहां परिवादी ने पुत्री केसर को माण्डलगढ़ में कक्षा दसवीं में प्रवेश दिलाकर आ गया। वहां कामकाज के लिए परेशान करने और और पढ़ाई नहीं करने देने से आहत होकर केसर ने ससुराल में फंदे पर झूलकर आत्महत्या कर ली। माण्डलगढ़ थाना पुलिस ने अभियुक्त पिता-पुत्र को आत्महत्या के लिए मजबूर करने के आरोप में गिरफ्तार कर अदालत में चालान पेश किया। विशिष्ट लोक अभियोजक सविता शर्मा ने अभियुक्तों के खिलाफ गवाह और दस्तावेज पेशकर आरोप सिद्ध किया। अदालत ने दोनों को सात साल की सजा सुनाई।





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