हिण्डौनसिटी. केन्द्र सरकार ने भले ही धरतीपुत्रों को सम्बल देने के लिए उनके खेतों में उपजी फसल की खरीद समर्थन मूल्य पर शुरू कर दी है, लेकिन सरकारी समर्थन की धीमी रफ्तार के चलते किसान अपनी सरसों को कृषि उपज मंडी के खुले बाजार में बेचने को मजबूर हैं। इसकी बानगी यह है कि खरीद शुरू होने के पांच दिन में महज 18 किसानों की 372 क्विन्टल सरसों की खरीद हो सकी है। वहीं तुलाई के लिए मंगवाए 10 कांटों में से 8 कांटे खरीद केंद्र में अनुपयोगी रखे हैं।
सूत्रों के अनुसार कृषि उपज मंडी में खरीद एजेंसी हिण्डौन क्रय विक्रय सहकारी समिति द्वारा एक अप्रेल से खरीद केन्द्र स्थापित कर समर्थन मूल्य पर सरसों की खरीद शुरू की गई है। लेकिन कामकाज की मंथर गति के कारण चार अप्रेल तक मात्र 18 किसानों की 372 क्विन्टल सरसों की खरीद की गई है। जबकि समर्थन मूल्य पर सरसों बेचने के लिए क्षेत्र के 3585 किसान पंजीयन करा चुके हैं।
उल्लेखनीय है कि 90 दिन तक चलने वाली समर्थन मूल्य की खरीद के लिए सरकार ने गेहूं के लिए 1840, सरसों के लिए 4200 व चना के लिए 4600 रुपए प्रति क्विंटल की दर निर्धारित की हैं। सरसों एवं चना की खरीद के लिए राजफैड व गेहूं की खरीद के लिए एफसीआई द्वारा केन्द्र बनाए जाने थे। लेकिन अभी तक केवल सरसों की खरीद ही शुरू हो सकी है। चना और गेहूं की खरीद के लिए किसानों को अभी और इंतजार करना पड़ सकता है।
बार-बार बदल रहे नियम-
किसानों को समर्थन मूल्य के कांटे पर अपनी पैदावार की बिक्री के लिए पंजीकरण कराने में पसीने छूट रहें हैं। जटिल नियमों के साथ आधा दर्जन से अधिक दस्तावेजों की अनिवार्यता उनकी परेशानी को बढ़ा रही है। हालात यह है कि क्रय विक्रय सहकारी समिति प्रबंधन को बार-बार नियमों में बदलाव करना पड़ रहा है। समिति के प्रधान व्यवस्थापक डॉ. कैलाश मीणा ने बताया कि नए बदलाव के अनुसार अब सरसों व चना की खरीद के लिए गिरदावरी की प्रति में पी-35 क्रमांक व दिनांक के साथ हल्का पटवारी के सील समेत हस्ताक्षर कराने होंगे। इसके लिए सात अप्रेल अंतिम तिथि निर्धारित की है। इसके बिना किसान के माल की तुलाई नहीं होगी।





No comments:
Post a Comment