आग से लडऩे के लिए स्थानीय निवेशक, उद्यमी व व्यापारियों को जापानी उद्यमियों से सीखने की जरूरत है। नीमराणा स्थित जापानी जोन में संचालित शतप्रतिशत फैक्ट्रियों में आग बुझाने के पूरे उपकरण हैं जबकि अन्य क्षेत्रों में चल रही फैक्ट्री, दुकान, गोदाम व प्रतिष्ठानों में से दो प्रतिशत में भी अग्निरोधक उपकरण नहीं है। फैक्ट्रियों में आग बुझाने के मामूली उपकरण भी नहीं हैं। जिससे गर्मियां आते ही कई बड़ी फैक्ट्री आग की चपेट में आ जाती हैं। जबकि अग्निशमन उपकरणों पर मात्र दो से पांच लाख रुपए खर्च होता है।
फायर ऑफिसर बबूर राम का कहना है कि फैक्ट्रियों में आग बुझाने के सामान्य उपकरण होना जरूरी है। स्मोक डिटेक्टर लगाने से धुआं उठते ही सायरन बज जाता है। कूलिंग सिस्टम होने पर आग लगते ही स्वत: बुझाने का काम शुरू हो जाता है। स्प्रिंकलर व हॉज रील जैसे उपकरण लगा लिए जाएं तो पूरा बचाव किया जा सकता है। फैक्ट्री की दीवारों पर फायर एक्सटिंग्यूशर लगाकर रखने से छोटी-मोटी आग को फैलने से रोका जा सकता है।
कहीं एनओसी नहीं
शहर में एक दिन पहले लगी ईटाराणा औद्योगिक क्षेत्र वाली फैक्ट्री के पास फायर एनओसी नहीं थी। आग बुझाने के उपकरण नहीं थे। दो साल पहले दीपक एप्रो में आग लगी। वहां भी पर्याप्त उपकरण नहीं थे। बाद में उसने फायर एनओसी ली। घंटाघर के निकट शॉपिंग मॉल में लगी आग तीन दिन में बुझी थी। वहां भी फायर एनओसी नहीं थी। कुछ दिन पहले एमआईए में जिस प्लांट में आग लगी, उसने भी एनओसी नहीं ले रखी थी।
आग लगने के बाद एनओसी ले रहे
अग्निश्मन केन्द्र के अधिकारियों ने बताया कि आग लगने के बाद कई फैक्ट्री संचालकों ने आग बुझाने के उपकरण लगा कर फायर एनओसी प्राप्त की है। दीपक एप्रो व आयशर ने भी आग लगने के बाद ही फायर एनओसी ली।
नगर परिषद व प्रशासन गंभीर नहीं
फायर एनओसी मामले में नगर परिषद व जिला प्रशासन भी गंभीर नहीं हैं। कभी जांच कर कार्रवाई नहीं होती है। फायर एनओसी नहीं लेने पर कार्रवाई नहीं होती। यही नहीं बहुमंजिला इमारतों में भी आग बुझाने के पूरे इंतजाम नहीं है।
आग बुझाने वाला सिस्टम भी अधूरा
नगर परिषद के अग्निश्मन केन्द्र का सिस्टम भी अधूरा हैं। वाहनों का संचालन करने के लिए पूरा स्टाफ नहीं है। जिसके कारण करोड़ों की लागत से बने अग्निश्मन केन्द्र कोई काम नहीं आ रहे हैं।





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