बूंदी. नेत्रहीन के जीवन में भी एक दिन ऐसा आए कि अमावस की रात का अंधेरा छटे, उसे भी इस सुंदर दुनिया को देखने का अवसर मिले। इसी मकसद को लेकर बूंदी की जिला कलक्टर रुक्मणि रियार और पुलिस अधीक्षक ममता गुप्ता ने नेत्रदान का संकल्प लिया है। वे मरणोपरान्त नेत्रदान करेंगी ताकि किसी नेत्रहीन के जीवन में उजाला हो सकें। दोनों ही अधिकारियों ने शाइन इंडिया फाउंडेशन के कार्यकर्ताओं को अपना संकल्प पत्र सौंपा है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार विगत 8 वर्षों में संस्था के जागरूकता अभियान से 675 जोड़ी कॉर्नियां दान कर चुके हैं। जिनका नि:शुल्क व सफल प्रत्यारोपण प्रदेश के सबसे बड़े सवाई मान सिंह अस्पताल जयपुर में स्थित आई बैंक के माध्यम से 500 कॉर्निया अंधता से पीडि़त व्यक्तियों में कर दिया गया है।
कौन नहीं कर सकता
टीबी, एड्स, टायफाइड, मलेरिया, पीलिया, डेंगू, चिकनगुनिया, सेप्टीसीमिया व तीन दिन से अधिक वेंटिलेटर पर रहने वाले का नेत्रदान संभव नहीं है। पानी में डूबकर, जलकर होने वाली मृत्यु में भी संभव नहीं है। सायनाइड जहर के सेवन करने में हुई मृत्यु में नहीं ले सकते है।
कहां करें सम्पर्क
नेत्रदान का कार्य सम्पन्न करने में शाइन इंडिया फाउंडेशन की टीम का सहयोग लेना होगा। फाउंडेशन की टीम किसी भी तरह के मौसम में २४ घंटे तैयार रहती है। बूंदी में संस्था के इदरीस बोहरा व आशा नुवाल शहर संयोजक नियुक्त हैं जिनसे 94141-758 05, 70148 -52940 व शाइन इंडिया फाउंडेशन कोटा से 8 38 6 900101-102 पर सम्पर्क किया जा सकता है।
कौन कर सकता है
किसी भी जाति, धर्म व रक्त ग्रुप के २ वर्ष से ८० वर्ष तक की उम्र के स्त्री, पुरुष के मृत्यु उपरांत 6 से 8 घंटे के अंदर नेत्रदान संभव है। हृदय रोगी, बीपी, शुगर, मोतियाबिंद के ऑपरेशन, चश्मे लगे हुए व्यक्ति नेत्रदान कर सकते है। सभी तरह के जहर खाकर किए गए सुसाइड में ले सकते हैं।
जरूरी सावधानी
आंखों को पूरी तरह से बंद कर दें।
आंखों पर गीली पट्टी, रुमाल या कपड़ा रख दें।
नेत्रदान होने तक कमरे का पंखा बंद कर दें।
नेत्रदानी परिवारों को धन्यवाद करना चाहूंगी, वे धन्य हैं। नेत्रदान जैसे पुनीत कार्य को सम्पन्न करवाने के लिए लोगों को आगे आना चाहिए। हम मरने के बाद भी किसी के जीवन में उजास करके जाएं, इससे बढ़ा कोई धर्म नहीं हो सकता।
रुक्मणि रियार, जिला कलक्टर, बूंदी
मैं भी अपना संकल्प पत्र भरकर इस नेक कार्य में अपना योगदान देना चाहूंगी। इस बात की खुशी भी है कि हमारे जिले में लोग नेत्रदान-अंगदान के प्रति जागरूक हो रहे हंै। अब तक 8 जोड़ी नेत्रदान भी हो गए।
ममता गुप्ता, पुलिस अधीक्षक, बूंदी
नेत्रदान लेने आने के लिए किसी भी तरह का शुल्क नहीं लिया जाता। नेत्रदान की प्रक्रिया घर, अस्पताल व मुक्तिधाम में सिर्फ 10 से 15 मिनट में पूरी कर ली जाती है। नेत्रदान के बाद नेत्रदाता की आंख पर प्लास्टिक की आंख रख दी जाती है, जिससे अंतिम दर्शन में ऐसा आभास नहीं होता कि नेत्रदान भी हुआ है। जिला कलक्टर और पुलिस अधीक्षक की घोषणा लोगों के लिए प्रेरणादायी साबित होगी।
इदरीस बोहरा, बूंदी शहर संयोजक, शाइन इंडिया फाउंडेशन





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