रेलमगरा. क्षेत्र में मंगलवार को लगातार दूसरे दिन बेमौसम की बारिश ने किसानों के मुंह तक आए निवाले को छिन लिया तो बारिश के साथ आए जबर्दस्त तुफान ने क्षेत्रभर में कहर बरपाने का काम किया।
क्षेत्र में आज सुबह मौसम साफ रहने के साथ तेज धूप निकल आई थी। लेकिन सुबह 11 बजे से फिर से हल्के बादल छा गए और इसके बाद करीब दो घंटे तक सूरज की बादलों के साथ लुका-छिपी का दौर चलता रहा। दोपहर करीब एक बजे आसमान पूरी तरह बादलों से अट गया और धूल भरी हवाओं का दौर शुरू हो गया। इन हवाओं ने कुछ क्षणों में भयंकर तुफान का रूप ले लिया, जिससे आमजन को भारी नुकसान भुगतना पड़ा। करीब पौन घंटे तक तुफान के रौद्र रूप के कारण रेलमगरा से गिलूण्ड, दरीबा, सिन्देसर खुर्द, कांकरोली एवं कुरज मार्ग पर सैकड़ों की संख्या में पेड़ धराशायी हो गए। पछमता के निकट बबूल का पेड़ गिरने से मुख्य सड़क मार्ग पर करीब दो घंटे तक अवरुद्ध हो गया। बाद में आसपास के ग्रामीणों ने श्रमदान करते हुए पेड़ की टहनियां काट कर एक छोर से मार्ग को शुरू किया। इस दौरान सड़क के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गई। वहीं, रेलमगरा से दरीबा मार्ग पर भी एक पेड़ के धराशायी हो जाने से मार्ग काफी देर तक अवरुद्ध रहा। रेलमगरा से सिन्देसर खुर्द, कांकरोली एवं कुरज की ओर जाने वाले मार्गों पर भी सड़क किनारे दर्जनों पेड़ धराशायी हो गए, जिससे वाहनों की आवाजाही प्रभावित हुई। गिलूण्ड कस्बे के बस स्टैण्ड पर पेड़ के गिरने से टीन से बना केबिन टूट गया तो इसी पेड़ के नीचे दबने से एक कार क्षतिग्रस्त हो गई। दरीबा में पेड़ गिरने से एक कार एवं एक बाइक क्षतिग्रस्त हो गई। दरीबा सहित क्षेत्र के अमरपुरा, काबरा, कोटड़ी, रेलमगरा, गिलूण्ड, पछमता, बामनिया कलां, सिन्देसर कलां आदि गांवों में भी दर्जनों स्थानों पर टीन शेड उड़ जाने की सूचनाएं मिली है। हालांकि इनसे जनहानि की कोई सूचना नहीं है। मेहन्दूरिया में स्थित पावर ग्रीड स्टेशन के बाहर लगा विद्युत ट्रांसफार्मर तेज हवाओं के कारण धराशायी हो गया, जिससे बिजली के तार सड़क मार्ग पर टूटकर गिर गए। इससे क्षेत्रभर में विद्युत आपूर्ति ठप हो गई। गिलूण्ड कस्बे के खांकल बावजी मंदिर परिसर में खड़ा विशाल नीम का पेड़ भी धराशायी होकर देवरे पर जा गिरा जिससे देवरे की दिवारें क्षतिग्रस्त हो गई।
ओलों ने धोई उम्मीदें
कस्बे सहित क्षेत्र में मंगलवार को हुई बारिश के साथ छिटपुट स्थानों पर जमकर ओलावृष्टि भी हुई, जिससे फसलों में भारी नुकसान हुआ है। कस्बे में चणबोर की आकृति के ओले गिरे, वहीं क्षेत्र के गिलूण्ड, काबरा, कोटड़ी, अमरपुरा, शिवपुरा, दरीबा, मेहन्दूरिया, बामनिया कलां में भारी ओलावृष्टि हुई। ओलावृष्टि के कारण खेतों में पड़ी फसलों की बालियों का अनाज बिखर गया। कई जगह पक्षी काल का ग्रास बन गए। दूसरी ओर खेतों में काटकर सूखने के लिए छोड़ी गई फसलें बरसाती पानी में तैरती नजर आई। किसानों ने बताया कि बारिश से गिली हो चुकी इन फसलों की गुणवत्ता प्रभावित होगी, वहीं ओलों की वजह से इनकी उपज भी कम होगी।
सैकड़ों बीघा गेहंू की फसल बर्बाद
कुंवारिया. कस्बे के साथ ही आसपास के गांवो में विगत दो दिनो से हो रही बेमौसम बारिश ओलावृष्टी से किसानों की हाड़तोड़ मेहनत से तैयार फसल को चौपट कर दिया है।
क्षैत्र के भावा, कुंवारिया, महासतियों की मादड़ी, फियावड़ी, बिनोल, लापस्या, जुणदा, कुरज, गोगाथला गांवों में दो दिनों से हुई वर्षा ने किसानों पर वज्रपात सा कर दिया है। तेज हवाओं के साथ हुई वर्षा से किसानों के खेतों में काटकर रखे गए फसलों के पुले भीग गए, जिससे उनमें भारी नुकसान की आशंका है। जुणदा गांव में विगत पांच माह से खेतो में तम्बु लगाकर फसल तैयार करने वाले मारवाड़ से आए परिवार पर दो दिनों से हुई वर्षा ने कुठाराघात किया। मारवाड़ से आए तुलसाराम रावत, गिरधारी सिंह, लक्ष्मण सिंह ने बताया कि पंाच माह में फसल तैयार की और एक ही रात में पूरी फसल चौपट हो गई। इधर, रेलवे स्टेशन बस्ती में पानी की निकासी के अभाव में थोड़ी सी बारिश में सड़क पर पानी भर गया, जिससे क्षेत्र के लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीण अशरफ मोहम्मद, सलीम खां, लतीफ मोहम्मद, हारून बेगम, रईस बेगम, नसीम बानु, आमना बेगम, बिशा बानु ने बताया कि रेलवे स्टेशन बस्ती में मस्जिद के समीप इतना पानी भर गया है कि लोगों को निकलने में दिक्कत हो रही है।






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