बाड़मेर।
राजस्थान की बाड़मेर-जैसलमेर लोकसभा सीट ( Barmer Jaisalmer Lok Sabha Constituency) शुरू से ही चर्चा में रही है। अब ये सीट एक बार फिर से चर्चाओं में है क्योंकि बसपा ( BSP ) की टिकट पर यहां से चुनाव लड़ रहे बर्खास्त आईपीएस पंकज चौधरी ( IPS Pankaj Choudhary ) को चुनाव आयोग का झटका लग सकता है। चुनाव आयोग उनका नामांकन रद्द भी कर सकता है! अयोग्यता के प्रावधान के अन्तर्गत केंद्र या राज्य सरकार की ओर से भ्रष्टाचार या अन्य किसी भी आधार पर सेवा से बर्खास्त किए गए अधिकारी चुनाव नहीं लड़ सकते। ऐसे में ये आशंका जताई जा रही है कि पंकज चौधरी का नामांकन भी खारिज हो सकता है! आज बुधवार को नामांकन पत्रों की जांच होनी है। ऐसे में यदि चौधरी ने भारत निर्वाचन आयोग द्वारा जारी सर्टिफिकेट नहीं दिया है तो उनका नामांकन खारिज हो सकता है।
भारतीय पुलिस सेवा से बर्खास्त हुए आईपीएस पंकज चौधरी ने लोकसभा चुनाव 2019 से अपनी नई राजनीतिक पारी की शुरुआत की है। चौधरी ने बसपा का दामन थामा तो बसपा ने उन्हें बाड़मेर-जैसलमेर लोकसभा सीट से अपना प्रत्याशी बनाया है। लेकिन चौधरी केलिए ये इतना आसान नहीं होगा, क्योंकि ऐसे मामले में उस अधिकारी को चुनाव लडऩे के लिए पहले भारत निर्वाचन आयोग के नियमों के तहत सर्टिफिकेट लेना होता है। इस सर्टिफिकेट को जारी करने से पूर्व यह ध्यान रखा जाता है कि अधिकारी को किस आधार पर बर्खास्त किया गया है।
पत्नी के रहते दूसरी शादी करने के मामले में हुए बर्खास्त
आपको बता दें कि वर्ष 2009 बैच के आईपीएस पंकज चौधरी को पहली पत्नी के रहते दूसरी शादी करने के मामले में गृह मंत्रालय ने बर्खास्त कर दिया और उनकी सेवा समाप्ति कर दी गई थी। चौधरी 2011 से 2018 के बीच कोटा, बांसवाड़ा, जैसलमेर, अजमेर, बूंदी, दिल्ली और जयपुर में अलग अलग पदों पर रहे हैं। मंत्री सालेह मोहम्मद के पिता गाजी फकीर की हिस्ट्रीशीट खोलने के बाद वे पहली बार चर्चा में आए थे। इसके बाद नैनवां, बूंदी में हुए सांप्रदायिक दंगों के बाद उन्हें लापरवाही बरतने के आरोप में हटाया भी गया था। चौधरी ने राजस्थान के कई आईपीएस, आईएएस अधिकारियों के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोप लगाकर चर्चा में रहे थे।





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