हिण्डौनसिटी. दो माह पहले पीली चुनरियी से धरती का शृंगार करने वाली फसल ने अब मण्डी के बाजार को गुलजार कर दिया है। भरपूर बरसात व मौसम तंत्र के ठीक रहने से जिलेभर में इस बार सरसों की बम्पर पैदावार हुई है। बेहतर फसल उत्पादन के कारण कैलाशनगर स्थित जिले की सबसे बड़ी कृषि उपज मंडी सरसों से अटी है। किसान के साथ अच्छी आमद से व्यापारी भी बढ़े कारोबार से खुशहाल है। फसल कटाई कार्य जोरों पर चल रहा है। ऐसे में मंडी में सरसों की आवक में तेजी बनी हुई है।
एक लाख 75 हजार क्विन्टल सरसों की हो चुकी आवक-
मंडी समिति सचिव राजेश कर्दम ने बताया कि यार्ड में प्रतिदिन आठ से 10 हजार क्विन्टल सरसों की आवक हो रही है। 15 फरवरी से शुरू हुए सीजन में अब तक मंडी में करीब एक लाख 75 हजार क्विन्टल सरसों की आवक हो चुकी है। मंडी के ए, बी और सी ब्लॉक सरसों की ढेरियों से अटे है। वाहनों की आवाजाही बनी रहने से मंडी में दिनभर जाम की स्थिति बनी रहती है।
80 हजार हेक्टेयर में हुई थी बुवाई-
कृषि विभाग के सहायक निदेशक मोहनलाल मीणा ने बताया कि कोहरा व पाला नहीं पडऩे से सरसों की फसल में गत वर्ष के मुकाबले इस बार पकाव भी अच्छा रहा। एक हेक्टेयर में में लगभग 25 से 30 क्विन्टल सरसों की की पैदावार हुई है। क्षेत्र में इस बार 80 हजार 200 हेक्टेयर भूमि में सरसों की फसल की बुवाई की गई थी। सीजन के शुरुआती दौर में मंडी में हो रही आवक से सरसों के बेहतर उत्पादन का अंदाजा लगाया जा सकता है।
फायदे का सौदा बनी सरसों-
लहचौड़ा निवासी किसान देवीसिंह ने बताया कि सरसों की फसल में बढिय़ा पकाव के कारण किसानों के चेहरों पर रौनक है, वहीं मंडी में दाम भी ठीक ही मिल रहे हैं। किसानों का मानना है कि इस बार सरसों की फसल फायदे का सौदा साबित हुई है। मंडी केे खुले बाजार में इस बार प्रति क्विन्टल सरसों के करीब 3500 रुपए के भाव मिल रहे हैं। आपको बता दें कि गेहूं व अन्य फसल की अपेक्षा सरसों की फसल में लागत काफी कम आती है।
नेपाल तक जाती है हमारी सरसों-
राजस्थान खाद्य व्यापार संघ के संयुक्त सचिव विशम्भर बंडीभोला ने बताया कि तैलीय मात्रा अधिक होने से जगरौटी व मांड क्षेत्र की सरसों की विदेशों में भी मांग है। उन्होंने बताया कि स्थानीय मंडी में आने वाली सरसों में तेल की अधिकतम मात्रा 42 से 43 प्रतिशत व न्यूनतम मात्रा 40 से 42 प्रतिशत होती है। यही वजह है कि क्षेत्र की सरसों की आपूर्ति नेपाल के अलावा भरतपुर, अलवर, यूपी, पंजाब, दिल्ली, हरियाणा, पश्चिम बंगाल सहित देश के विभिन्न प्रांतों में की जाती है। मंडी में ई-नाम प्रयोग शाला में किसान अपनी सरसों की जांच करा सकते हैं।





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