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लिव इन रिलेशन में पैदा हुई बच्ची को लावारिस छोडऩे के बजाय किया देखरेख का सौदा

-मामला खुलने पर बाल कल्याण समिति ने असली मां को सौंपी बच्ची


श्रीगंगानगर. बिना शादी या लिव इन रिलेशन में रहने के दौरान मां बनने पर पैदा हुए बच्चे को लोकलाज के भय से लावारिस छोड़ देने के मामले अक्सर सामने आते रहते हैं। यहां लिव इन रिलेशन में रह रहे युवक और युवती ने इस संबंध के चलते पैदा हुई बच्ची को लावारिस छोडऩे की बजाय एक महिला से उसके लालन-पालन का सौदा कर लिया। बच्ची की पैदाइश की वास्तविकता का पता लालन पालन करने वाली महिला को चला तो मामला पुलिस तक पहुंच गया। अब बाल कल्याण समिति ने बच्ची को उसकी असली मां को सौंप दिया है।

 

जानकारी के अनुसार एक युवक व युवती परिवार वालों से छिपकर शहर के समीप एक गांव में किराए के मकान में लिव इन रिलेशन में रह रहे थे। वहां रहते हुए युवती गर्भवती हो गई तो युवक ने उसे अपनी बहन बताकर एक निजी अस्पताल में प्रसव करवाया तो बच्ची पैदा हुई।

 

अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद दोनों एक धर्मशाला में रहने लगे। नवजात बच्ची को लेकर दोनों कहीं जा नहीं सकते थे, सो युवक ने एक एेसी महिला की तलाश की जो पैसे लेकर बच्ची का लालन-पालन कर सके। एक महिला के राजी होने पर उसके साथ स्टाम्प पर अनुबंध किया गया और बच्ची के लालन-पालन की एवज में ३०० रुपए प्रतिदिन के हिसाब से देना तय हुआ। तब उस महिला को यह बताया गया कि बच्ची की मां सडक़ हादसे में घायल हुई है और उसका बीकानेर में उपचार चल रहा है।

 

संदेह पर बिगड़ी बात------------------—

युवक ने पहले तो खुद को बच्ची का मामा बताया और फिर पिता बताने लगा। इस पर बच्ची का लालन-पालन करने वाली महिला को युवक पर संदेह हो गया। उसने इसकी शिकायत सदर थाना पुलिस को दी तो वहां से यह मामला मानव तस्करी विरोधी यूनिट में चला गया।

 

मामले की जांच के दौरान पुलिस लालन-पालन करने वाली महिला को बच्ची सहित तथा लिव इन रिलेशन में रह रहे युवक व युवती को पूछताछ के लिए लाई तो पूरा मामला खुल गया। युवक व युवती ने लोक लाज के भय से यह कदम उठाना बताया। इसके बाद बच्ची को बाल कल्यण समिति के समक्ष पेश किया गया। कानूनी पहलुओं के अध्ययन के बाद बाल कल्याण समिति अध्यक्ष अधिवक्ता लक्ष्मीकांत सैनी व सदस्यों ने बच्ची को लिव इन में रहने वाली युवती को सौंप दिया क्योंकि कानूनी रूप से वही उसकी मां है।

 

एेसे बच्चे को मिलेंगे सभी अधिकार------------------------—

-बाल कल्याण समिति अध्यक्ष एवं अधिवक्ता लक्ष्मीकांत सैनी ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार लिव इन में पैदा हुए बच्चे को भी वह सभी अधिकार प्राप्त हैं, जो एक शादी शुदा मां से पैदा हुए बच्चे को होते हैं। इसमें बच्चे को मां व पिता की संपत्ति पर पूरा अधिकार है। बच्चे के लालन-पालन की जिम्मेदारी भी उन्हीं मां व पिता की है।

 

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राजनेता का है सटीक उदाहरण

- देश के बड़े राजनेता के एक महिला से लिव इन रिलेशन में पैदा हुए बच्चे ने बड़े होकर इसका खुलासा किया और राजनेता की संपत्ति में अपना अधिकार मांगा। इस पर उसके जैविक पिता ने उसको पुत्र मानने से मना कर दिया तो मामला कोर्ट में पहुंचा। जहां उसका डीएनए टेस्ट कराया गया। इस टेस्ट ने सिद्ध कर दिया था कि वह राजनेता का ही पुत्र है। कोर्ट के निर्देश पर पिता को अपने उस पुत्र को सभी अधिकार देने पड़े।



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