भिवाड़ी. उद्योगनगरी में दूषित पानी की समस्या से छुटकारा दिलाने के लिए बनाए जा रहे एसटीपी का निर्माण कार्य अभी तक पूरा नहीं हो सका है। इसके लिए जिम्मेदार अफसर लगातार काम पूरा होने के लिए मोहलत मांगते हुए नहीं थक रहे, लेकिन समय रहते काम नहीं होने के कारण भिवाड़ी को हरियाणा की तोहमत झेलनी पड़ रही है।
गौरतलब है कि भिवाड़ी से फैक्ट्रियों का दूषित व रसायनयुक्त पानी के साथ आवासीय कॉलोनियों का भी गंदा पानी बहकर हरियाणा की ओर से जाता है। यह पानी कई बार अलवर बाइपास पर एकत्र होकर राजस्थान व हरियाणा के लोगों के लिए मुसीबत खड़ी कर चुका है। इसी कारण दोनों राज्यों के बीच दूषित पानी की समस्या को लेकर अन्तरराज्यीय विवाद बना है।
इस समस्या के निवारण के लिए भिवाड़ी में 12 एमएलटी की क्षमता के 5 एसटीपी का निर्माण होना है। एक पर कोर्ट का स्टे लगा है, जबकि एक ट्रॉयल पर है और 3 पर अभी काम ही चल रहा है। पिछले साल अक्टूबर में हुई राजस्थान और हरियाणा के अफसरों की बैठक में राजस्थान के अफसरों ने दिसम्बर, 18 तक काम पूरा होने का विश्वास दिलाया और तब तक हरियाणा के अफसरों से धैर्य रखने के लिए मोहलत मांगी थी। ऐसी ही मोहलत पहले भी मांगी जा चुकी है, लेकिन फिर भी अभी तक काम अधूरा है और अब जिम्मेदार जून, 19 तक काम पूरा होने का दावा कर रहे हैं।
फिलहाल यह हैं बंदोबस्त
भिवाड़ी में फैक्ट्रियों के दूषित व रसायनयुक्त पानी को शोषित करने के लिए 9 एमएलडी क्षमता का सीईटीपी बना हुआ है। इसके पास ही 4 एमएलडी का एसटीपी भी बना है, जिसमें आवासीय क्षेत्रों का पानी शोधित होता है। यूं तो कई बार फैक्ट्रियों या फिर आवासीय क्षेत्रों से अधिक मात्रा में पानी आने से समस्या पैदा हो जाती है, लेकिन लेकिन बारिश के दिनों में इनकी क्षमता कम पड़ जाती है और उस समय समस्या गंभीर रूप धारण कर लेती है। हल्की बारिश होने पर फैक्ट्रियों या सोसायटियों में एकत्र पानी छोड़ देने पर हालत गंभीर होती रहती है।
भिवाड़ी का पानी, हरियाणा की परेशानी
हरियाणा के लोगों का कहना है कि भिवाड़ी का दूषित पानी उनके भूजल को खराब कर रहा है। उनके यहां बोरिंगों से निकलने वाले में झाग आने लगे हैं। उसकी टीडीएस भी 29 सौ तक पहुंच गई है।
दबाव बढऩे पर होते वैकल्पिक इंतजाम
दूषित पानी को लेकर जब-जब भिवाड़ी के अफसरों पर हरियाणा का दबाव बढ़ा, तब-तब ही वैकल्पिक इंतजाम कर तत्कालिक राहत प्रदान की गई। ऐसा ही गत वर्ष अक्टूबर माह में भी हुआ। उस समय जिम्मेदारों की कमेटी गठित कर सख्त निगरानी की गई और निगरानी के लिए टीमें बनाई गई। अवरुद्ध नालों की सफाई कराई गई। पाइप लाइन के लीकेजों को ठीक कराया गया। पाŸवनाथ मोड़ के समीप बने नाले पर खुले गेट को बंद कराया। इसी गेट से होकर पानी बहता हुआ नाले के माध्यम से अलवर बाइपास तक पहुंच रहा था।
दूषित पानी का संघर्ष
ठ्ठजुलाई, 2015 में धारूहेड़ा नपा की उप्रपधान सुमित्रा मुकदम ने एनजीटी में याचिका दायर की।
20 सिंतबर, 2015 को अलवर व रेवाड़ी प्रशासन के बीच बैठक हुई।
29 दिसंबर, 2015 को फिर से अलवर व रेवाड़ी प्रशासन के बीच बैठक हुई।
12 मार्च, 2016 को चंडीगढ़ से आई टीम ने किया दूषित पानी की समस्या का सर्वे किया।
जून, 16 को नंदरामपुर बास व धारूहेड़ा के लोगों ने एडीएम को ज्ञापन सौंपा।
17 जून 2016 में केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण टीम ने धारूहेड़ा व भिवाड़ी में सर्वे कर मिट्टी व पानी के नमूने लिए।
18 व 22 जुलाई, 16 को दोबारा से केंद्रीय प्रदूषण टीम ने सर्वे कर नमूने लिए।
जुलाई, 2017 में एनजीटी ने भिवाड़ी प्रशासन को दी चेतावनी और एसटीपी की पूरा ब्यौरा मांगा।
दिसंबर, 2017 में भिवाडी प्रशासन को एनजीटी की ओर 5 एसटीपी बनाने के निर्देश दिए गए।
मई, 2018 में रेवाड़ी एसडीएम से दौरा तक दिसंबर माह तक एसटीपी बनाने की चेतावनी दी।
अक्टूबर, 2018 में मुख्यमंत्री को महेश्वरी की पंचायत ने ज्ञापन देकर नाले को बंद की रखी मांग।
अक्टूबर, 2018 ने रेवाड़ी एसडीएम ने पानी नहीं छोडऩे के निर्देश भिवाड़ी प्रशासन को दिए। इस दौरान हुई बैठक में रेवाड़ी प्रशासन को आश्वस्त किया गया कि दिसम्बर तक काम पूरा हो जाएगा।
मार्च, 2019 में रेवाड़ी एसडीएम की मौजूदगी में धारूहेड़ा में भिवाड़ी प्रशासन के साथ बैठक हुई। इसमें भी भिवाड़ी में एसटीपी निर्माण जल्द से जल्द काम पूरा करने को कहा गया।





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