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अब उधार दूध देने वाले भी कर रहे 'ना

बीकानेर . बीकानेर जिले में अन्नपूर्णा दूध योजना के तहत स्कूलों में विद्यार्थियों को दिए जाने वाले दूध के लिए तीन माह से बजट नहीं मिला है। बजट के अभाव में शिक्षक उधारी के दूध से काम चला रहे थे, लेकिन दूध विक्रेता अब शिक्षकों को दूध उधार में देने से मना करने लगे हैं। एेसे में जिले की कई स्कूलों में विद्यार्थी दूध से वंचित हो रहे हैं। साथ ही शिक्षकों को परेशानी उठानी पड़ रही है।
सरकार स्कूलों में बच्चों को नियमित दूध पिलाने के आदेश निकाल चुकी है। अब शिक्षकों के सामने समस्या खड़ी हो गई है कि बजट के बिना दूध कैसे पिलाया जाए? शिक्षा विभाग की लेटलतीफी से बजट समय पर जारी नहीं होता है और शिक्षकों को मुश्किल हो रही है। गांवों में दूध की सप्लाई देने वाले पहले एक सप्ताह, फिर एक माह तक पैसों का इंतजार कर लेते थे, लेकिन इस बार तीन महीने से अधिक होने पर वे स्कूलों में दूध सप्लाई करने से मना करने लगे हैं। दूध विक्रेता आए दिन संस्था प्रधान व शिक्षकों से दूध की राशि देने को कह रहे हैं।
शिक्षकों ने बताया कि दूध विक्रेताओं ने समय पर राशि नहीं मिलने पर स्कूलों में दूध की सप्लाई नहीं करने की चेतावनी दी हे। पिछले साल नवंबर-दिसंबर में दूध के लिए बजट जारी हुआ था, उसके बाद अब तक बजट जारी नहीं हुआ है। एेसे में स्कूलों के लिए दूध योजना पर संकट सा आ गया है।
शिक्षा विभाग की लापरवाही का खमियाजा अब शिक्षकों को भुगतना पड़ रहा है। पैसे नहीं मिलने से दूध विक्रेता दूध देने से मना रहे हैं तो कई स्कूलों में तो शिक्षक अपनी जेब से ही बच्चों को दूध पिला रहे हैं।

बजट जारी करवाएंगे
आयुक्तालय से राशि आ चुकी है। इस राशि की स्वीकृति सोमवार को जिला कलक्टर से करवाकर स्कूलों में बजट जारी करवाने का काम शुरू कर देंगे।
मो. इस्माइल, जिला शिक्षा अधिकारी (प्रारंभिक), बीकानेर

योजना चलना मुश्किल
दूध के बजट के लिए कई बार शिक्षा विभाग के अधिकारियों को अवगत करवा चुके हैं, लेकिन आज तक कोई सुनवाई नहीं हुई है। बजट नहीं होने से यह योजना चलना नामुमकिन है।
श्रवण पुरोहित, प्रदेश मंत्री, शिक्षक संघ (शेखावत)



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