शादाब अहमद / जयपुर. चुनावों में दागियों को वोट मिलने का सबसे बड़ा कारण उनका प्रचार में अधिक धन खर्च करना है। इसके अलावा विभिन्न स्तरों से जागरूकता अभियान चलने के बावजूद प्रदेश में अब भी नकदी, शराब और उपहार वितरण के दम पर प्रत्याशियों को वोट मिल रहे हैं। वहीं देश की तरह प्रदेश में भी चाहे शहर हो या ग्रामीण बेरोजगारी ही सबसे बड़ा मुद्दा है। एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉम्र्स की हाल में जारी की गई रिपोर्ट ( ADR Report ) में इस तरह का खुलासा किया गया है।
चुनाव में दागियों को टिकट देने पर अक्सर राजनीतिक दल सवालों में घेरे में रहते आए हैं। उनको टिकट मिलने के बाद मतदाता कई कारणों से उनके पक्ष में मतदान करता है। इसमें सबसे बड़ा कारण दागी प्रत्याशी का चुनाव में धनबल का उपयोग करना सामने आया है। 97 फीसदी मतदाता यह तो चाहते हैं कि संसद और विधानसभा में दागी नहीं बैठने चाहिए, लेकिन दागी प्रत्याशी के बहुत अधिक खर्च करने के चलते 30 फीसदी मतदाता उन्हें वोट भी कर जाते हैं। जबकि 19 फीसदी मतदाता दागी प्रत्याशी की जाति और धर्म देखकर वोट कर रहे हैं। 27 फीसदी ऐसे भी मतदाता थे, जिन्हें प्रत्याशी के आपराधिक रिकार्ड की जानकारी ही नहीं थी। चुनारव आयोग एक ओर प्रत्याशी के दागी होने की जानकारी का अखबारों में प्रकाशन के निर्देश दे रहा है, दूसरी ओर अभी भी बड़ी संख्या में मतदाताओं को यह जानकारी नहीं है कि किसी भी प्रत्याशी का आपराधिक रिकार्ड हासिल किया जा सकता है।
पता है नकदी-उपहार लेना अवैध, फिर भी लेकर देते हैं वोट
एडीआर के सर्वे में मतदाताओं से प्रत्याशियों के पक्ष में मतदान करने के कारण भी जानने की कोशिश की गई। इसमें चौकाने वाली बात सामने आई है कि 61 फीसदी मतदाताओं को यह जानकारी थी कि नकदी और उपहार लेकर वोट देना अवैध है। इसके बावजूद 24 फीसदी मतदाताओं ने माना कि नकद, शराब और उपहार के चलते उन्होंने वोट किया।
स्वविवेक से करते हैं फैसला
राजस्थान के 62 फीसदी मतदाता किसी भी प्रत्याशी को वोट देते समय खुद की राय को अहम मानते हैं। जबकि 19 फीसदी मतदाताओं के लिए उनके परिवार के सदस्यों और 17 फीसदी के लिए उनके पति व पत्नी की राय महत्व रखती है।
- क्या आपको पता है प्रत्याशी के दागी होने की जानकारी ली जा सकती है
हां-36
नहीं-64
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-मतदाता के लिए प्रत्याशी जाति,धर्म और पार्टी भी अहम
1. आपके के लिए प्रत्याशी की जाति
-महत्व नहीं रखती है-72 फीसदी
-महत्व रखती है-28 फीसदी
2. आपके के लिए प्रत्याशी की पार्टी
-महत्व नहीं रखती है-26 फीसदी
-महत्व रखती है-74 फीसदी
3.आपके के लिए प्रत्याशी
-महत्व नहीं रखता है-28 फीसदी
-महत्व रखती है-72 फीसदी
प्रदेश की शीर्ष तीन प्राथमिकताएं
बेहतर रोजगार-66.76 फीसदी
बेहतर चिकित्सा-43.13 फीसदी
बेहतर कानून व्यवस्था-42.41 फीसदी
कब और कैसे हुआ सर्वे
यह सर्वे लोकसभा चुनाव 2019 से पहले अक्टूबर 2018 से दिसम्बर 2018 के बीच किया गया है। इसमें सभी 25 संसदीय क्षेत्र के करीब साढ़े बारह हजार मतदाताओं के बीच जाकर सर्वे किया गया।
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