-दोनों पार्टियों के राष्ट्रीय अध्यक्षों ने जालोर के रामसीन में ही की सभा
-रमेश शर्मा
रामसीन (जालोर)। जालोर जिले का वही रामसीन गांव, जहां शुक्रवार को दूसरे दिन फिर राजनीतिक मेला भरा। वही वाहनों का रैला, झण्डे, बैनर, कटआउट्स लिए लोग और लगभग उतनी ही भीड़। फर्क सिर्फ इतना था, एक दिन पहले कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी आए थे और शुक्रवार को भाजपा अध्यक्ष अमित शाह। दोनों की सभाओं में एक समानता थी कि दोनों के केन्द्र में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी थे। कल मोदी को सत्ता से हटाने के लिए वोट मांगे गए। इसलिए बार-बार उनका चौकीदार के रूप में जिक्र हुआ। जबकि, इस सभा में जोश से भरे कार्यकर्ता ‘मोदी-मोदी’ के नारे लगाते रहे। दोनों राष्ट्रीय नेताओं का पब्लिक से कनेक्ट करने का तरीका भी एकदम जुदा रहा।
मोदी फिर एक बार क्योंकि उन्होंने लोगों का मन जीता - अमित शाह
-अमित शाह का फोकस
अमित शाह मुश्किल से आधा घंटे रामसीन में रुके। 24 मिनट भाषण दिया। कार्यकर्ताओं में जोश भरा और जोधपुर के लिए उड़ गए। शाह के भाषण के बीच मोदी-मोदी के नारे लगते रहे। यहीं शाह ने गिना दिया कि इस चुनाव में देशभर में ये उनकी 259 वीं जनसभा है। हर तरफ उन्हें यही ‘मोदी-मोदी’ का नारा सुनाई दे रहा है, उन्होंने कहा, यह जन-जन का नारा इसलिए बन गया क्योंकि मोदी ने लोगों का मन जीता है। इसी यकीन के साथ कहा, मोदी के प्रति यही निश्चय उन्हें फिर सत्ता में लाएगा। शाह ने शुरुआत रामसीन और मारवाड़ की धरा और यहां के बाशिन्दों के गुणगान से की। राजस्थान के शौर्य और पुलवामा के शहीदों को याद किया। देर से आने के लिए क्षमा मांगी और इसके बाद ‘राहुल बाबा’ कहकर हमलावर हो गए।
राहुल गांधी का उन्होंने कई बार नाम लिया। एक बार राहुल गांधी की शैली पर मिमिक्री भी की और उन पर तंज भी कसा। शाह ने करीब चार मिनट सरकार की उपलब्धियां गिनाई लेकिन इसमें जालोर का उल्लेख बार-बार किया। सिरोही और आबूरोड का भी जिक्र किया। अंतिम आठ मिनट में शाह देश की सुरक्षा के मुद्दे पर आ गए जिसे वह प्रचार में मुख्य हथियार के तौर पर इस्तेमाल कर रहे हैं। जनता से यही सवाल किया कि बताओ मोदी के अलावा कौन है जो आतंकियों और पाकिस्तान का जवाब दे सकता है?
चौकीदार ने सिर्फ अपने मन की बात की- राहुल गांधी
-राहुल गांधी का टारगेट
राहुल गांधी गुरुवार को करीब 50 मिनट रुके। उनके मंच पर रहते पहले प्रदेश अध्यक्ष और उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट और मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने संबोधित किया। राहुल गांधी के सम्बोधन के बीच भी चौकीदार चोर है के नारे लगे। उन्होंने भी दो बार जनता की भावना जान कर यही नारे लगवाए लेकिन उनका भाषण कांग्रेस के घोषणा पत्र के इर्द-गिर्द ही सिमटा रहा। स्थानीय मुद्दों को उन्होंने भी छुआ। सांसद पर भी सवाल खड़े किए और इस बहाने ‘चौकीदार’ पर हमलावर रहे कि यहां की पानी और सिंचाई की जरूरतों के लिए 1500 करोड़ और ट्रेन के लिए 80 करोड़ नहीं दे सके लेकिन अपने अमीर दोस्तों को लाखों करोड़ रुपए का फायदा पहुंचा दिया।
राहुल गांधी ने किसान प्रधान इस क्षेत्र की जनता को ध्यान में रखते हुए अधिकतम समय उनके घोषणा पत्र में प्रस्तावित किसान बजट पर ही फोकस रखा। जिसमें किसानों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य, कर्जा, बोनस, कृषि पैदावार के संरक्षण और ग्रामीण युवाओं के लिए रोजगार के सपने दिखाए। जनता को भरोसा दिया कि मोदी तो सिर्फ अपने मन की बात करते हैं, हम आपके मन बात सुनेंगे और उसी आधार पर अपनी नीतियां बनाएंगे। कभी राफेल का मुद्दा लेकर जोरदार हमलावार रहे राहुल ने इसका सिर्फ जिक्र भर किया। प्रचार के अंतिम दौर में कांग्रेस की रणनीति के तहत पाकिस्तान, पुलवामा, कश्मीर के इश्यू से राहुल ने किनारा ही किया।





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