जैसलमेर. महज 23 साल की उम्र। 4 साल की उम्र में पोलियो ने पांवों की शक्ति को क्षीण कर दिया। इसके बावजूद लगन से पढ़ाई-लिखाई की और समाज को सकारात्मक राह दिखाने का पहाड़-सा ऊंचा लक्ष्य बनाया। जन्म स्थान अलवर से 800 किलोमीटर दूर जैसलमेर में सरकारी शिक्षक की नियुक्ति प्राप्त करने के बाद राजकीय विद्यालयों में प्राथमिक कक्षाओं में पढऩे वाले विद्यार्थियों को शिक्षण सामग्री के नि:शुल्क वितरण का महत्ती कार्य का आगाज कर दिया। इसके लिए उन्होंने संगठन भी बनाया। यह प्रेरक व्यक्तित्व है, अलवर निवासी दिनेश गुर्जर का। दिनेश का गत अर्से तृतीय श्रेणी शिक्षकों की भर्ती में जैसलमेर के राजकीय बालिका उच्च प्राथमिक विद्यालय लाणेला में बतौर शिक्षक नियुक्ति हुई है।
पत्रिका के सामाजिक सरोकारों में सहभागी
दिनेश ने बताया कि पोलियो के अभिशाप से दिव्यांग बनने के बावजूद उन्होंने जीवन में हार नहीं मानी और लगातार पढ़ते तथा आगे बढ़ते रहे। समाजसेवा का जज्बा उनके मन में निरंतर बलवान हुआ और वे अलवर में स्वच्छता अभियान के ब्रांड एंबेसेडर बने। इसके अलावा वहां राजस्थान पत्रिका की ओर से राजनीति की शुचिता के तहत चलाए गए अभियान में हजारों लोगों को विवेकानुसार मतदान करने की प्रेरणा देने का कार्य किया। दिनेश कविताएं भी लिखते हैं। जिनमें वे इंसान को कठिनाइयों से नहीं घबराकर जोश के साथ जीवन जीने की प्रेरणा देते हैं। इन कविताओं का वे सर्वत्र वाचन करते हैं।
जैसलमेर में मिल रहा प्यार और सहयोग
अपने घर से सैकड़ों किलोमीटर दूर जैसलमेर में रह रहे दिनेश गुर्जर ने बताया कि उन्हें यहां किसी तरह की दिक्कत नहीं है। उनका कहना है कि अगर हमारी जीवनशक्ति मजबूत है तो शारीरिक बाधा कोई मायने नहीं रखती। दिल में समाज के लिए कुछकर गुजरने का जज्बा हो तो अपने आप मार्ग प्रशस्त हो जाता है। उनकी तमन्ना यही है कि सभी राजकीय विद्यालयों में पढऩे वाले बच्चों के पास शिक्षण सामग्री हो। इस कार्य में उनके साथी व अन्य लोग सहयोग कर रहे हैं।





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