जसराज ओझा
भीलवाड़ा।
आपने जमीन से सोना-चांदी निकलने की बात तो सुनी होगी, लेकिन शहर में एक एेसी गली है जहां का कचरा व मिट्टी भी बेशकीमती है। इस गली की मिट्टी व कचरा निकालने के लिए भी बोली लगती है। यह जगह है शहर का सर्राफा बाजार। यहां नालियों में व सड़कों पर गिरी मिट्टी को एकत्र कर कुछ परिवार इसमें से सोना-चांदी तक निकाल लेते हैं।
दरअसल, सुनार जब काम करते हैं, तो सोने-चांदी की घिसाई व कटाई के दौरान बारीक कण बिखर जाते हैं। दुकानों की सफाई करते समय नालियों में तथा सड़कों पर बिखर जाते हैं। कुछ परिवार बरसों से इस मिट्टी में से सोना-चांदी निकालते हैं।
पहुंच जाते हैं सुबह पांच बजे
ये लोग अलसवेरे जेवरात बनाने वालों की दुकानों के बाहर से मिट्टी एकत्र करते हैं। मिट्टी को कई बार पानी से धोते हैं। बार-बार धोने के बाद अंत में चांदी व सोने के कण बचते हैं। चार दशक से यह काम कर रहे भवानीनगर निवासी मोहम्मद अली ने बताया कि धातु के कणों को तेजाब की भट्टी में तपाकर सोने और चांदी की अलग-अलग डली बना लेते हैं। शहर में करीब दो दर्जन नियारगर परिवार हैं।
कचरा देख बताते हैं राशि
सर्राफा व्यापारी जसवंत सोनी ने बताया कि नियारगर कचरा देखकर राशि तय करते हैं। दुकान का सालभर का कचरा हो है, तो 25 से 30 हजार रुपए मिल जाते हैं। कई बार एक से अधिक नियारगर होने पर दुकान के कचरे व मिट्टी की बोली भी लगती है।





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